क्रिकेटर ऋचा घोष, मंत्री, 3 विधायकों के नाम ‘विचाराधीन’ श्रेणी में : तृणमूल

क्रिकेटर ऋचा घोष, मंत्री, 3 विधायकों के नाम ‘विचाराधीन’ श्रेणी में : तृणमूल
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कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस ने रविवार को निर्वाचन आयोग पर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान "गुपचुप धांधली" करने का आरोप लगाया और दावा किया कि भारतीय क्रिकेटर ऋचा घोष, पश्चिम बंगाल के मंत्री मोहम्मद गुलाम रब्बानी और पार्टी के तीन अन्य विधायकों के नाम अंतिम मतदाता सूची में "विचाराधीन" श्रेणी में रखे गए हैं। तृणमूल कांग्रेस ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि भारत की आईसीसी महिला विश्व कप विजेता टीम की सदस्य घोष को 28 फरवरी को प्रकाशित मतदाता सूची में ‘विचाराधीन’ श्रेणी में रखा गया है। पार्टी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘भाजपा और निर्वाचन आयोग का गुपचुप धांधली का तमाशा अब नयी ऊंचाई पर पहुंच गया है। विश्व कप विजेता टीम की स्टार खिलाड़ी, बंगाल का गौरव, भारत की हीरो, नीली जर्सी पहनकर देश को गौरव दिलाने वाली विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋचा घोष को अब अंतिम मतदाता सूची में 'विचाराधीन' श्रेणी में रखा गया है।’’ तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि घोष ने विदेश में भारत का उत्कृष्ट प्रतिनिधित्व किया और हर बंगाली की प्रशंसा अर्जित की। सिलीगुड़ी की 22 वर्षीय विकेटकीपर-बल्लेबाज भारत की 2025 आईसीसी महिला विश्व कप विजेता टीम की सदस्य थीं।

पार्टी ने कहा कि ‘‘उन्हें (ऋचा घोष को) इस अपमानजनक जांच का सामना करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, उनका नाम इस श्रेणी में रखा गया है, उनकी मतदाता स्थिति पर सवाल उठाए जा रहे हैं और इस मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में उनका लोकतांत्रिक अधिकार खतरे में है’’। तृणमूल ने कहा, “जब मशहूर और राष्ट्रीय हस्तियों को भी मनमाने ढंग से निशाना बनाया जा सकता है, उनसे पूछताछ की जा सकती है और उन्हें इस अपमानजनक प्रक्रिया का शिकार बनाया जा सकता है, तो आम मतदाता के लिए क्या उम्मीद है?”

पार्टी ने कहा कि चार मौजूदा विधायकों - रब्बानी, रफीकुर रहमान, तोराफ हुसैन मंडल और स्वाति खंडोकर - को भी इसी श्रेणी में रखा गया है। पार्टी ने कहा कि बीरभूम जिला परिषद सभाधिपति काजल शेख और उनकी मां को भी विचाराधीन श्रेणी में रखा गया है। पार्टी ने दावा किया कि नैहाटी नगर पालिका पार्षद सुशांत सरकार और उनकी मां का नाम मतदाता सूची से पूरी तरह हटा दिया गया है, जबकि पार्टी के कई अन्य पदाधिकारियों को भी नाम हटाने से लेकर विचाराधीन श्रेणी में रखे जाने की स्थिति का सामना करना पड़ा है।

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