

कोलकाता : अन्नपूर्णा योजना के 12 पन्नों वाले आवेदन फॉर्म को लेकर उठ रहे सवालों के बीच मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सरकार की ओर से विस्तृत सफाई दी है। उन्होंने कहा कि आवेदन प्रक्रिया में की गई सख्ती का उद्देश्य वास्तविक लाभार्थियों तक सरकारी सहायता पहुंचाना और फर्जीवाड़े पर रोक लगाना है।
नवान्न में सोमवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राज्य की लक्ष्मी भंडार योजना से अन्नपूर्णा योजना में लाभार्थियों को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। उनके अनुसार, जांच में पता चला है कि बड़ी संख्या में फर्जी खातों के माध्यम से सरकारी योजना की राशि निकाली जा रही थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं के लिए शुरू की गई लक्ष्मी भंडार योजना का लाभ कई पुरुष भी उठा रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक कम से कम 22 ऐसे खाते चिह्नित किए गए हैं, जिनमें पुरुष लाभार्थियों के नाम पर राशि प्राप्त की गई। उनके मुताबिक, कुछ मामलों में एक ही व्यक्ति या परिवार द्वारा कई खाते संचालित किए जा रहे थे। उन्होंने दावा किया कि राकिबुल शेख, मुस्तफिजुर रहमान और तारिकुर रहमान जैसे नामों से जुड़े कई संदिग्ध खाते जांच के दायरे में आए हैं।
'लक्ष्मी भंडार' में लगभग 30 लाख फर्जी लाभार्थी
शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि लगभग 30 लाख फर्जी लाभार्थियों के माध्यम से लक्ष्मी भंडार योजना का पैसा निकाला गया। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए डीजीपी को विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही संभावित वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की भी जांच की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सोमवार से अन्नपूर्णा योजना के ऑनलाइन आवेदन शुरू हो चुके हैं और बुधवार से लाभ वितरण की प्रक्रिया भी शुरू होगी। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील करते हुए कहा कि सभी पात्र लाभार्थियों को योजना का लाभ मिलेगा। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का पैसा केवल योग्य और वास्तविक लाभार्थियों तक ही पहुंचे।