डीम्ड यूनिवर्सिटी मुद्दे पर सीपीआईएम का समर्थन

डीम्ड यूनिवर्सिटी मुद्दे पर सीपीआईएम का समर्थन
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सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के राज्य नेता डी. अय्यप्पन ने पार्टी के राज्य कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में कॉलेजों की मौजूदा संबद्धता प्रणाली को डीम्ड विश्वविद्यालय ढांचे में बदलने के प्रस्ताव के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन को मजबूत समर्थन दिया। उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए बताया कि वे हाल ही में लिटिल अंडमान के एक आधिकारिक कार्यक्रम से लौटे हैं और वापसी के तुरंत बाद जेएनआरएम कॉलेज के सामने कई दिनों से चल रहे छात्र विरोध प्रदर्शन की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने संयुक्त कार्रवाई मंच के तहत विभिन्न राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों, जिनमें एबीवीपी, एनएसयूआई और एसएफआई शामिल हैं, के संयुक्त एवं शांतिपूर्ण आंदोलन की सराहना की। उन्होंने कहा कि कैंपबेल बे से लेकर डिगलीपुर और जनजातीय क्षेत्रों तक हुए बंद और विरोध प्रदर्शनों से यह स्पष्ट है कि जनता में इस निर्णय के प्रति व्यापक असंतोष है। अय्यप्पन के अनुसार हजारों छात्र और नागरिक इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं, फिर भी भारतीय जनता पार्टी का स्थानीय नेतृत्व प्रशासन के निर्णय का समर्थन कर रहा है।

उन्होंने कहा कि 1980 के दशक के उत्तरार्ध से कॉलेजों की पांडिचेरी केंद्रीय विश्वविद्यालय से संबद्धता एक स्थापित व्यवस्था रही है और शैक्षणिक मानकों को लेकर कोई गंभीर शिकायत नहीं रही। उनका आरोप है कि डीम्ड विश्वविद्यालय की ओर बढ़ना डिग्री के मूल्य, शुल्क संरचना और बुनियादी ढांचे को लेकर अनिश्चितता पैदा कर सकता है।

प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त दस्तावेजों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों और राजनीतिक प्रतिनिधियों के बीच क्लस्टर विश्वविद्यालय और बाद में डीम्ड विश्वविद्यालय के प्रस्तावों पर पूर्व में चर्चा हुई थी, लेकिन छात्रों, शिक्षकों और आम जनता से व्यापक परामर्श नहीं किया गया।

उन्होंने 2023 से पार्टी द्वारा किए गए लगातार पत्राचार के बावजूद प्रशासन की कथित उदासीनता की आलोचना की और केंद्र सरकार तथा स्थानीय प्रशासन से निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील की। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि डीम्ड विश्वविद्यालय स्थापित किया जाना है तो उसे अलग ढांचे में संचालित किया जाए और सातों सरकारी कॉलेजों की पांडिचेरी विश्वविद्यालय से संबद्धता को बरकरार रखा जाए।

अंत में अय्यप्पन ने कहा कि सीपीआईएम आने वाले दिनों में भी छात्र आंदोलन को नैतिक और राजनीतिक समर्थन देती रहेगी तथा संवाद के माध्यम से ऐसा समाधान निकाला जाना चाहिए जो द्वीपसमूह के छात्रों के शैक्षणिक भविष्य की रक्षा करे।

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