माकपा ने मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल

मुख्य निर्वाचन अधिकारी के दावों को बताया ‘तथ्यात्मक रूप से गलत’
माकपा ने मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल
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श्री विजयपुरम : विशेष सघन मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक हलकों में एक बार फिर विवाद गहराता दिख रहा है। भारतीय मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सचिव डी. अयप्पन ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) द्वारा बैठक में प्रस्तुत किए गए आँकड़ों पर कड़ा ऐतराज जताते हुए उन्हें “तथ्यात्मक रूप से गलत” करार दिया। सचिवालय में आयोजित राजनीतिक दलों की बैठक में CEO ने दावा किया था कि विशेष सघन पुनरीक्षण के तहत 99% प्रपत्रों का वितरण पूरा हो चुका है। अयप्पन ने इस दावे को जमीनी सच्चाई से दूर बताते हुए कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं की रिपोर्ट के अनुसार मुश्किल से 60% प्रपत्र ही घर–घर पहुँच पाए हैं।

अयप्पन ने चेतावनी दी कि यदि पुनरीक्षण प्रक्रिया को मौजूदा ढंग से ही आगे बढ़ाया गया, जैसा कि पहले बिहार में देखा गया था, तो अंडमान–निकोबार में भी हजारों वास्तविक मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं। उन्होंने विशेष रूप से उन नागरिकों का उल्लेख किया जो अस्थायी रूप से द्वीपों से बाहर रहते हैं। उनका कहना था कि यह प्रक्रिया ऐसे नागरिकों को “कवर किया गया” दिखाने भर की औपचारिकता बनकर रह गई है, जबकि वास्तविकता बिल्कुल अलग है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में व्यापक संशोधन का उद्देश्य अधिकतम पात्र नागरिकों को सम्मिलित करना होना चाहिए, न कि कागज़ी दावे कर प्रक्रिया को जल्दबाजी में पूरा करना।

माकपा सचिव ने बताया कि उनकी पार्टी शुरुआत से इस मॉडल का विरोध करती रही है और आज की बैठक में भी सभी राजनीतिक दलों से इस संबंध में जिम्मेदार रुख अपनाने की अपील की गई। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची लोकतंत्र की बुनियाद है और इसके अद्यतन में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गलत जानकारी गंभीर परिणाम दे सकती है। अयप्पन ने कहा कि गलत आँकड़ों के प्रचार से प्रशासनिक भ्रम पैदा होता है तथा वास्तविक प्रगति पर पर्दा पड़ जाता है।

पार्टी ने विशेष सघन पुनरीक्षण की समय सीमा बढ़ाने की भी मांग की है। अयप्पन ने स्पष्ट किया कि अंडमान–निकोबार की भौगोलिक परिस्थितियाँ बेहद चुनौतीपूर्ण हैं—द्वीपों के बीच दूरी, परिवहन की सीमाएँ और संपर्क सेवाओं की कमी के कारण केवल एक महीने में इस व्यापक अभियान को पूरा करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि प्रक्रिया को पर्याप्त समय नहीं मिला, तो आगामी पंचायत चुनावों में बड़ी संख्या में मतदाता अपने मताधिकार से वंचित रह जाएंगे, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित होगी।

माकपा ने निर्वाचन आयोग से अपील की है कि वह जमीनी रिपोर्टों का संज्ञान ले, वास्तविक प्रगति को पारदर्शी रूप से सार्वजनिक करे और यह सुनिश्चित करे कि प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल हो। पार्टी ने कहा कि यह मुद्दा किसी एक दल का नहीं, बल्कि लोकतंत्र की मजबूती से जुड़ा हुआ है।

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