SIR एक्सरसाइज पर ECI के दावे का CPI(M) ने किया विरोध

कहा, आयोग का बयान वास्तविक स्थिति को सही तरीके से नहीं दर्शाता मांग की ‘तारीफ करने वाली पार्टियों के नाम बताए जाएं’ ECI का दावा : अधिकांश दलों ने SIR की सराहना की

SIR एक्सरसाइज पर ECI के दावे का CPI(M) ने किया विरोध
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केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर नया विवाद सामने आया है। CPI(M) ने चुनाव आयोग के उस दावे का विरोध किया है, जिसमें कहा गया था कि अधिकांश राजनीतिक दलों ने इस प्रक्रिया की सराहना की है। पार्टी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर कहा कि उसने इस अभ्यास पर गंभीर आपत्तियां जताई थीं और आयोग का बयान वास्तविक स्थिति को सही तरीके से नहीं दर्शाता।

ECI के बयान पर जताई आपत्ति

CPI(M) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने चुनाव आयोग को लिखे पत्र में कहा कि आयोग ने 9 मार्च को जारी बयान में दावा किया था कि अधिकतर राजनीतिक दलों ने पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया की सराहना की है। पार्टी ने इस दावे को विवादास्पद बताते हुए कहा कि यह बयान वास्तविक स्थिति को सही तरीके से पेश नहीं करता।

तीन दिन के दौरे में आयोग से हुई थी चर्चा

CPI(M) ने कहा कि चुनाव आयोग की पूर्ण बेंच ने पश्चिम बंगाल के तीन दिवसीय दौरे के दौरान राजनीतिक दलों के साथ बैठक की थी। इस बैठक में पार्टी ने SIR प्रक्रिया को लेकर अपनी गंभीर चिंताएं और आपत्तियां आयोग के सामने स्पष्ट रूप से रखी थीं।

‘तारीफ करने वाली पार्टियों के नाम बताए जाएं’

पार्टी ने आयोग से सवाल करते हुए कहा कि यदि वास्तव में अधिकांश दलों ने इस प्रक्रिया की सराहना की है, तो उनके नाम सार्वजनिक किए जाने चाहिए। मोहम्मद सलीम ने अपने पत्र में लिखा कि जिन राजनीतिक दलों ने इस प्रक्रिया की तारीफ की और जो इसके विरोध में थे, उनके नाम छिपाना सच्चाई का मजाक उड़ाने जैसा है।

60 लाख से ज्यादा वोटरों की चिंता का दावा

CPI(M) ने यह भी आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के दौरान ‘लॉजिकल अंतर’ जैसे कारणों का हवाला देकर वास्तविक मतदाताओं को परेशान किया जा रहा है। पार्टी के मुताबिक, इससे राज्य में 60 लाख से अधिक मतदाताओं के बीच अपने मताधिकार को लेकर चिंता और अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गई है।

किसी पात्र मतदाता को वंचित नहीं करने की मांग

पार्टी ने चुनाव आयोग से मांग की कि किसी भी पात्र मतदाता को राजनीतिक, धार्मिक, सामाजिक या आर्थिक आधार पर मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। CPI(M) ने कहा कि मतदाता सूची की समीक्षा की प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए, ताकि किसी भी योग्य मतदाता का नाम सूची से न हटे।

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