TET अनिवार्यता पर घमासान, शिक्षा मंत्री से बैठक की मांग

90 हजार शिक्षकों का भविष्य अधर में
TET अनिवार्यता पर घमासान, शिक्षा मंत्री से बैठक की मांग
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मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्तर के शिक्षकों के लिए ''टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट'' (TET) को अनिवार्य करने के राज्य सरकार के फैसले से नया विवाद खड़ा हो गया है। स्कूल सर्विस कमीशन और प्राइमरी एजुकेशन बोर्ड को परीक्षा की तारीख तय करने के निर्देश के बाद बंगीय टीचर्स एंड एजुकेशन वर्कर्स एसोसिएशन ने स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन को ई-मेल भेजकर सभी मान्यता प्राप्त शिक्षक संगठनों के साथ तुरंत एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाने की मांग की है। संगठन का तर्क है कि इस एकतरफा फैसले से राज्य के 90 हजार से ज्यादा और देश भर के करीब 20 लाख सेवारत शिक्षकों का भविष्य अधर में लटक गया है। इसलिए प्रशासनिक स्तर पर अकेले निर्णय लेने के बजाय शिक्षकों के प्रतिनिधियों से सीधी बातचीत करके इस गंभीर समस्या का व्यावहारिक समाधान निकाला जाना आवश्यक है।

पुराने शिक्षकों का भविष्य संकट में

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार देश भर में कार्यरत शिक्षकों को 2028 तक TET पास करना अनिवार्य किया गया है, बशर्ते उनके रिटायरमेंट में 5 साल या उससे कम समय न बचा हो। हालांकि, शिक्षक संगठनों का विरोध इस बात को लेकर है कि राइट टू एजुकेशन एक्ट 2009 और एनसीटीई के नियमों के तहत जुलाई 2011 से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों को इस दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए था, क्योंकि वे उस समय के तय नियमों के आधार पर नौकरी पा चुके थे। एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी स्वपन मंडल ने कहा कि सेवारत शिक्षकों पर इस तरह अचानक परीक्षा का अतिरिक्त मानसिक बोझ डालना पूरी तरह से गलत है और सरकार को इस संकट से पार पाने के लिए तुरंत सकारात्मक कदम उठाने चाहिए।

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