

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग साइंस एंड टेक्नोलॉजी (IIEST), शिबपुर में प्रस्तावित सफाई अभियान को लेकर प्रशासन और शिक्षकों के बीच मतभेद सामने आए हैं। संस्थान की ओर से जारी एक ऑफिस ऑर्डर में स्टूडेंट्स, रिसर्च स्कॉलर्स, टीचर्स और सभी विभागों के स्टाफ मेंबर्स से तय शनिवार को सफाई अभियान में भाग लेने और इन कार्यक्रमों के दौरान अटेंडेंस की मैपिंग करने के निर्देश दिए गए थे। इस फैसले का IIEST टीचर्स एसोसिएशन ने कड़ा विरोध किया है। संस्थान के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी IIEST में एक विस्तृत सफाई अभियान की योजना बनाई गई है। आदेश के मुताबिक यह अभियान 10 जनवरी से शुरू होकर 27 जून तक चलेगा। इसके तहत हर विभाग को एक शनिवार को सफाई कार्यक्रम की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। ऑर्डर में सभी टीचर्स, स्टूडेंट्स, रिसर्च स्कॉलर्स और नॉन-टीचिंग स्टाफ से कार्यक्रम में भाग लेने का अनुरोध किया गया था। अधिकारी ने बताया कि इस बार कार्यक्रमों के बेहतर समन्वय और निगरानी के उद्देश्य से प्रशासन ने एक विशेष टीम का गठन किया है। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया कि हर सफाई कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों की अटेंडेंस दर्ज की जाएगी और कार्यक्रम समाप्त होने के बाद एक रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी जाएगी। हालांकि, संस्थान के शिक्षकों ने इस फैसले को अनुचित बताते हुए आपत्ति जताई है। IIEST टीचर्स एसोसिएशन ने इस संबंध में संस्थान के डायरेक्टर को एक औपचारिक पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि शिक्षकों की जनरल बॉडी मीटिंग में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि टीचर्स पर इस तरह की गतिविधियाँ थोपना गलत है और इससे अनावश्यक परेशानी पैदा हो सकती है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि शिक्षकों की अटेंडेंस रिकॉर्ड करने की प्रक्रिया से संस्थान का अकादमिक वातावरण प्रभावित हो सकता है। एसोसिएशन का मानना है कि इस तरह की अनिवार्य गतिविधियाँ टीचिंग, लर्निंग और शोध कार्यों में सकारात्मक योगदान देने के बजाय ध्यान भटका सकती हैं।
टीचर्स एसोसिएशन ने प्रशासन से अपील की है कि वह इस आदेश पर पुनर्विचार करे और शिक्षकों की पेशेवर भूमिका तथा अकादमिक स्वतंत्रता का सम्मान करे। वहीं, संस्थान प्रशासन का कहना है कि सफाई अभियान का उद्देश्य परिसर की स्वच्छता बनाए रखना और सामूहिक भागीदारी को बढ़ावा देना है, न कि किसी वर्ग पर दबाव बनाना। फिलहाल, इस मुद्दे पर संस्थान के भीतर चर्चा जारी है और सभी की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।