गवर्निंग बॉडी के अध्यक्ष की नियुक्तियों पर बंगाल में बढ़ा विवाद

उच्च शिक्षा मंत्री ने नियुक्तियों का किया पुरजोर बचाव
गवर्निंग बॉडी के अध्यक्ष की नियुक्तियों पर बंगाल में बढ़ा विवाद
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मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : पश्चिम बंगाल के सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों की गवर्निंग बॉडी के अध्यक्ष पदों पर भारतीय जनता पार्टी से जुड़े लोगों या सत्ताधारी दल के करीबियों को लगातार नामित किए जाने को लेकर राज्य में बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। आलोचकों और विपक्षी संगठनों का कहना है कि वर्तमान सरकार भी पिछली सरकार की राह पर चलकर उच्च शिक्षण संस्थानों में पार्टी का प्रभाव और दबदबा बनाने की कोशिश में है, जिससे शैक्षणिक परिसरों को राजनीति से मुक्त करने के चुनावी वादे पर सवालिया निशान लग गया है।

उच्च शिक्षा मंत्री ने किया बचाव

पत्रकारों से बातचीत करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने इन नियुक्तियों का पुरजोर बचाव किया और दावा किया कि कॉलेज परिसरों को राजनीतिक गंदगी से दूर रखने के लिए यही सबसे अच्छा और सोचा-समझा तरीका अपनाया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि शैक्षणिक क्षेत्र में दखल रोकने के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि वहां काम करने वाले लोग पार्टी की निर्धारित नीतियों के अनुसार चलें, जिसके सकारात्मक परिणाम आने वाले एक-दो सालों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगेंगे।

शिक्षक संगठनों और जानकारों की तीखी प्रतिक्रिया

इस पूरे घटनाक्रम पर कॉलेज और यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन ''वेबकुटा'' तथा ''AIDSO'' जैसे संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका मानना है कि मंत्री, विधायक और पार्टी पदाधिकारियों को अध्यक्ष बनाकर सत्ता परिवर्तन के बाद भी केवल राजनीतिक समीकरणों को ही बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके विपरीत, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े ''अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ'' ने इस कदम का समर्थन करते हुए कहा है कि राजनीतिक हस्तियां भी राजनीति से ऊपर उठकर समाज के हित में कार्य कर सकती हैं और इन नियुक्तियों से एक नई सकारात्मक मिसाल कायम होगी।

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