राज्यपाल नियुक्ति में राज्यों से परामर्श जरूरी : तृणमूल

राज्यपाल नियुक्ति में राज्यों से परामर्श जरूरी : तृणमूल
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सन्मार्ग संवाददाता

नयी दिल्ली : तृणमूल कांग्रेस ने शुक्रवार को कहा कि कई राज्यों में किये गये राज्यपालों के फेरबदल से मोदी सरकार का संवैधानिक संघवाद के प्रति अनादर झलकता है। पार्टी ने आरोप लगाया कि राजभवनों को भाजपा के ‘वार रूम’ में बदला जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस की यह प्रतिक्रिया तमिलनाडु के राज्यपाल आर. एन. रवि को पश्चिम बंगाल का नया राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर आई। उन्होंने डॉ. सी. वी. आनंद बोस की जगह ली है, जिन्होंने गुरुवार को अचानक पद से इस्तीफा दे दिया था। यह नियुक्ति राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा गुरुवार की देर रात कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्यपाल पदों में किए गए बड़े फेरबदल का हिस्सा थी।

तृणमूल नेता ने पुंछी आयोग की सिफारिशों का हवाला दिया

तृणमूल कांग्रेस के नेता सुखेंदु शेखर राय ने कहा कि राज्यपालों की नियुक्ति में राज्य सरकारों को शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकारिया आयोग और पुंछी आयोग की सिफारिशों का हवाला देते हुए कहा कि सरकारिया आयोग ने सिफारिश की थी कि राज्यपाल की नियुक्ति के लिए समिति बनायी जाए और उनमें राज्य सरकारों को शामिल किया जाए। रॉय ने ‘एक्स’ पर लिखा कि ‘केंद्र-राज्य संबंधों पर पुंछी आयोग ने भी सिफारिश की थी कि राज्यपाल की नियुक्ति संबंधित राज्य से परामर्श के बाद होनी चाहिए। लेकिन कौन सुनता है?’ राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस की उपनेता सागरिका घोष ने कहा कि यह ‘संघवाद का बुनियादी सिद्धांत है।’ घोष ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि ‘सरकारिया और पुंछी आयोग दोनों स्पष्ट थे कि राज्यपाल की नियुक्ति में राज्य सरकारों से परामर्श किया जाना चाहिए। यही संघवाद और लोकतंत्र का बुनियादी सिद्धांत है।’ उन्होंने आरोप लगाया कि ‘बंगाल के लिए एकतरफा तरीके से नए राज्यपाल की नियुक्ति करके मोदी सरकार ने एक बार फिर संवैधानिक संघवाद के प्रति अपना अनादर दिखाया है। राजभवन भाजपा के ‘वार रूम’ बनते जा रहे हैं।

क्या है पुंछी आयोग

केंद्र-राज्य संबंधों में सुधार पर पूर्व मुख्य न्यायाधीश मदन मोहन पुंछी की अध्यक्षता वाले पुंछी आयोग ने 2010 की अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की थी कि राज्यपाल की नियुक्ति एक समिति के माध्यम से होनी चाहिए, जिसमें मुख्यमंत्री भी शामिल हों। वहीं, उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजीत सिंह सरकारिया की अध्यक्षता वाले सरकारिया आयोग ने सिफारिश की थी कि राज्यपाल की नियुक्ति से पहले संबंधित राज्य के मुख्यमंत्री से परामर्श किया जाना चाहिए।

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