

झाड़ग्राम : आनेवाले 15 अगस्त को पूरे देशभर में 'आजादी' की 79वीं वर्षगांठ धूमधाम से मनायी जाएगी। वहीं स्वतंत्रता दिवस से ठीक एक सप्ताह पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बड़ा सवाल खड़ा करते हुए कहा, 'हम क्या सच में स्वतंत्र हैं?' गुरुवार को झाड़ग्राम में विश्व आदिवासी दिवस के कार्यक्रम से ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश में भाषा, पहचान और मताधिकार को लेकर साजिशें चल रही हैं। यही नहीं, देश के अलग-अलग राज्यों में बांग्ला भाषियों पर हो रहे कथित अत्याचारों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने इसे 'सुनियोजित सामाजिक भेदभाव' कहा। बंगालियों को ‘विदेशी’ ठहराने की एक साजिश है।
मुख्यमंत्री ने लोगों को आगाह करते हुए कहा, 'वोटर लिस्ट से नाम हटाने की साजिश रची जा रही है। बिना जानकारी के कोई भी फॉर्म न भरें, वरना आपका नाम गायब हो सकता है। यही एनआरसी का पहला कदम है।' उन्होंने यह चेतावनी दी कि 'एपिक कार्ड होने से कुछ नहीं होगा, नाम हटाने की साजिश चल रही है।'उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार ऐसे किसी भी नोटिस को नहीं मानेगी। ममता ने कहा कि डबल इंजन सरकार (केंद्र और बीजेपी शासित राज्य) एक गहरी साजिश रच रही है। उन्होंने कहा, 'नए मतदाताओं को मां-बाप के जन्म प्रमाणपत्र लाने को कहा जा रहा है। ये नाम हटाने और लोगों को अवैध बताकर देश से बाहर करने की कोशिश है। उन्होंने सरकार से पूछा, जो लोग कानून बना रहे हैं, उनके पास खुद कितने दस्तावेज हैं?
बंगालियों को ‘विदेशी’ ठहराने की साजिश : मुख्यमंत्री ने बांग्ला भाषा और पहचान के मुद्दे पर भी कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा, 'अगर बांग्ला भाषा नहीं होती, तो राष्ट्रगान किस भाषा में लिखा जाता?' गुरुग्राम, असम, राजस्थान, मध्यप्रदेश में बांग्ला भाषियों पर अत्याचार हो रहा है। मुम्बई में एक व्यक्ति की भाषा के कारण हत्या कर दी गई। ममता ने मतुआ, राजवंशी समुदाय को लेकर भी चिंता जतायी और कहा कि जानबूझकर कूचबिहार, अलीपुरदुआर में पत्र भेजकर लोगों को डराया जा रहा है।