

सात कॉलेजों के रूपांतरण के खिलाफ छात्र आंदोलन तेज
25वें दिन भी जारी छात्रों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन
सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजयपुरम : अंडमान एवं निकोबार टेरिटोरियल कांग्रेस कमेटी ने 27 फरवरी को स्थानीय प्रशासन और भाजपा नेतृत्व पर सात सरकारी महाविद्यालयों को डीम्ड यूनिवर्सिटी में परिवर्तित करने के प्रस्ताव को लेकर तीखा हमला बोला और इसे “छात्र विरोधी” तथा “गरीब विरोधी” कदम बताया। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए एएनटीसीसी अध्यक्ष रंगलाल हलदर ने कहा कि डीम्ड यूनिवर्सिटी प्रस्ताव के खिलाफ छात्रों का आंदोलन आज 25वें दिन में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने बताया कि छात्र द्वीपों में शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे हैं। निरंतर धरना, कैंडल मार्च और इस माह की 16 तारीख को अंडमान बंद के बावजूद प्रशासन ने छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं पर कोई सार्थक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हलदर ने वर्तमान में पांडिचेरी विश्वविद्यालय से संबद्ध सात कॉलेजों को डीम्ड यूनिवर्सिटी ढांचे में लाने के औचित्य पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि द्वीपों के लोगों की आर्थिक स्थिति ऐसे प्रयोग की अनुमति नहीं देती। अभी केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रणाली के तहत सेमेस्टर शुल्क लगभग 3,000 से 4,000 रुपये है, जबकि डीम्ड यूनिवर्सिटी में यह 40,000 से 50,000 रुपये, यहां तक कि 1 लाख रुपये प्रति सेमेस्टर तक पहुंच सकता है। उन्होंने पूछा कि गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चे इतनी फीस कैसे वहन करेंगे। उन्होंने कहा कि विशेषकर अंतर-द्वीपीय क्षेत्रों में कई परिवारों की दैनिक आय 400 से 500 रुपये से अधिक नहीं है। अनेक छात्र अपनी वार्षिक फीस भरने के लिए अवकाश के दौरान अंशकालिक काम करते हैं। क्या हम उन्हें उच्च शिक्षा से बाहर कर रहे हैं? एएनटीसीसी अध्यक्ष ने स्थानीय भाजपा नेतृत्व और वर्तमान सांसद पर विरोधाभासी रुख अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक रूप से छात्रों के हितों की रक्षा का आश्वासन दिया गया, लेकिन प्रक्रिया को रोकने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया। अधिसूचना से पहले राय लिए जाने की खबरों का हवाला देते हुए उन्होंने पारदर्शिता की मांग की और पूछा कि आखिर इस प्रस्ताव का समर्थन किसने किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास करने वाले एक पुलिस निरीक्षक और एक सिपाही का तबादला कर दिया गया। बताया गया कि यह विरोध भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें कांग्रेस भवन के पास पुतला दहन किया गया। कांग्रेस प्रतिनिधियों के अनुसार ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मियों ने स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए जिम्मेदारीपूर्वक कार्य किया, लेकिन शीघ्र ही उनके खिलाफ तबादला आदेश जारी कर दिए गए। पार्टी नेताओं ने इस कदम को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे पूरे पुलिस विभाग को नकारात्मक संदेश जाता है। उनका कहना था कि निष्पक्ष रूप से कर्तव्य निभाने वाले अधिकारियों को दंडात्मक कार्रवाई का सामना नहीं करना चाहिए। एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि शांति सुनिश्चित करने पर अधिकारी का तबादला होता है तो इससे बल के मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। महिला कांग्रेस अध्यक्ष जुबैदा बेगम ने भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि छात्रों ने फ्लैग प्वाइंट से तिरंगा पार्क तक कैंडल मार्च सहित सभी प्रदर्शन शांतिपूर्वक किए हैं। उन्होंने भाजपा को छोड़कर विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों, व्यापारियों, परिवहन संचालकों और अन्य राजनीतिक दलों का समर्थन देने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जब कलम पकड़ने वाले बच्चों को अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर बैठना पड़े तो यह किसी भी प्रशासन के लिए शर्म की बात है। एएनटीसीसी प्रवक्ता तमिल सेल्वम ने प्रस्तावित डीम्ड यूनिवर्सिटी ढांचे में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए।