सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को ‘आजादी’ के नारे लगाने वालों पर निशाना साधा और जादवपुर विश्वविद्यालय की दीवारों पर 2011 में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए माओवादी नेता किशनजी के सम्मान में भित्तिचित्र ''लाल सलाम किशनजी'' पर सवाल उठाया। दक्षिण कोलकाता के अपने भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में रक्षाबंधन के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शुभेंदु ने देशभक्ति, स्वतंत्रता संग्राम में पश्चिम बंगाल के योगदान और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का उल्लेख किया। उन्होंने देश को भीतर से बांटने की साजिश करने वालों पर भी निशाना साधा और कहा कि ऐसे तत्वों को "घर के कचरे की तरह साफ" कर देना चाहिए। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, ‘‘रक्षाबंधन का धार्मिक महत्व है और इस दिन भाई-बहन के रिश्ते का जश्न मनाया जाता है, लेकिन इस त्योहार के साथ देशभक्ति भी जुड़ गई है।’’शुभेंदु ने कहा कि सशस्त्र बल भारत के बाहरी दुश्मनों से निपटेंगे, लेकिन देश के भीतर भी कुछ लोग इसके हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं।
उन्हें घर के कचरे की तरह साफ कर देंगे...
उन्होंने कहा, ‘‘देश के बाहर जो दुश्मन हैं, उन्हें हमारी ताकत दिखाई जा चुकी है और आगे भी दिखाई जाएगी, लेकिन हमें यह संकल्प भी लेना चाहिए कि जो देश के भीतर से देशभक्ति, राष्ट्रवाद, वंदे मातरम और जन गण मन पर हमला करते हैं, उन्हें घर के कचरे की तरह साफ कर देंगे।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘आजादी’ की मांग वाले नारे उन्हें पीड़ा देते हैं और उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में दिए गए बलिदानों पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘जब मैं कोलकाता की सड़कों पर ‘आजादी’ के नारे देखता हूं तो मुझे पीड़ा होती है। यह आजादी किसलिए है? हमें अपने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान, नेताजी के संघर्ष और मातंगिनी हाजरा के बलिदान को याद करना चाहिए। भारत 1947 में आजाद हुआ।’’
''कश्मीर मांगे आजादी'' क्यों लिखा जाएगा? यह पीड़ादायक है...
जादवपुर विश्वविद्यालय का जिक्र करते हुए सवाल किया कि वहां और कोलकाता की सड़कों पर कश्मीर से जुड़े नारे क्यों लगाए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय के कला विभाग की दीवारों पर ‘लाल सलाम किशनजी’ भित्तिचित्र पर भी सवाल उठाया। शुभेंदु ने पिछले सप्ताह विश्वविद्यालय में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘ विश्वविद्यालय उत्कृष्टता का केंद्र है। कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के साथ हमारे कई युद्ध और बहुत संघर्ष हुए हैं। फिर कोलकाता की सड़कों पर ''कश्मीर मांगे आजादी'' क्यों लिखा जाएगा? यह पीड़ादायक है।’’
''लाल सलाम किशनजी'' लिखा देखकर दुख होता है...
उन्होंने कहा, ‘‘जादवपुर की दीवारों पर ''लाल सलाम किशनजी'' लिखा देखकर मुझे दुख होता है। आप नयी पीढ़ी को क्या सिखा रहे हैं? यह किशनजी कौन है? वही व्यक्ति जिसने देश के विभाजन की मांग की थी। किशनजी, जिसने संविधान को स्वीकार नहीं किया।’’
कौन है किशनजी... किशनजी के नाम से चर्चित कोटेश्वर राव वरिष्ठ माओवादी नेता था। नवंबर 2011 में पुलिस के साथ मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई थी। यह घटना पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के कुछ महीने बाद हुई थी।
सीएम शुभेंदु ने गुरुवार को कहा, "इंकलाब जिंदाबाद कहिए, लेकिन अगर आजादी कहेंगे तो मामला दर्ज होगा। अगर ''कश्मीर मांगे आजादी'' कहेंगे तो गिरफ्तारी होगी।’’ उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि विपक्ष ''वंदे मातरम'' के पूर्ण संस्करण का विरोध क्यों कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘वंदे मातरम किसी राजनीतिक नेता ने नहीं लिखा था। इसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था। इसमें आपत्ति क्या है?’’ बंगाल की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का भी उल्लेख किया और श्री चैतन्य, रामकृष्ण परमहंस तथा रानी रासमणि का जिक्र किया।