

कोलकाता : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तीन पन्नों का पत्र लिखकर SIR प्रक्रिया के नाम पर आम नागरिकों को परेशान किए जाने का गंभीर आरोप लगाया है। शनिवार को उन्होंने लिखा कि इस प्रक्रिया के कारण वह 'गहराई से स्तब्ध और व्यथित' हैं।
सुनवाई की व्यवस्था यांत्रिक बन चुकी है
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सुनवाई की पूरी व्यवस्था यांत्रिक बन चुकी है और आयोग के अपर्याप्त योजना वाले फैसलों के चलते भय का माहौल पैदा हुआ है। उनके अनुसार अब तक 77 लोगों की मौत हो चुकी है, 4 लोगों ने आत्महत्या की है और 17 नागरिक अस्पताल में भर्ती हैं, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासनिक अव्यवस्था और अत्यधिक कार्यभार पर डाली जानी चाहिए। ममता बनर्जी ने पत्र में कहा कि नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन से लेकर अभिनेता देव, कवि जय गोस्वामी, क्रिकेटर मोहम्मद शमी और भारत सेवाश्रम संघ के महराज तक को अपनी पहचान साबित करने के लिए नोटिस भेजी गयी हैं, जो अत्यंत शर्मनाक है। उन्होंने आरोप लगाया कि विवाहित महिलाओं को भी पहचान प्रमाण के लिए पूछताछ और सुनवाई में बुलाया जा रहा है, जो महिलाओं और वास्तविक मतदाताओं का अपमान है।
लोकतंत्र की आत्मा की रक्षा करनी चाहिए
मुख्यमंत्री ने यह भी सवाल उठाया कि कोई संवैधानिक संस्था देश की आधी आबादी के साथ ऐसा व्यवहार कैसे कर सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना प्रशिक्षण माइक्रो-ऑब्जर्वर और ऑब्जर्वर नियुक्त किए गए हैं तथा पूरी प्रक्रिया को तकनीकी आंकड़ों और एआई आधारित 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' तक सीमित कर दिया गया है। पत्र के अंत में ममता बनर्जी ने लिखा, 'पता है, देर हो चुकी है, फिर भी अभी समय है। आयोग को तुरंत यह उत्पीड़न बंद कर नागरिकों की पीड़ा कम करनी चाहिए और लोकतंत्र की आत्मा की रक्षा करनी चाहिए।' उन्होंने अपने हाथ से लिखकर यह भी जोड़ा कि उन्हें उत्तर मिलने की उम्मीद नहीं है, लेकिन अपना कर्तव्य निभाते हुए उन्होंने यह बात आयोग को बता दी।