बंगीय साहित्य परिषद को नया रूप, सीएम करेंगी शुभारंभ

बंगाल की विरासत को मिली नयी पहचान, शोधार्थियों को राहत
बंगीय साहित्य परिषद
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कोलकाता: उत्तर कोलकाता के मानिकतल्ला स्थित सदियों पुराने बंगीय साहित्य परिषद संग्रहालय के आधुनिकीकरण और पुस्तकालय के डिजिटलीकरण का कार्य हाल ही में पूरा हो गया है। इससे यह ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर अब नए स्वरूप में आम जनता के सामने आएगी। सूत्रों के अनुसार, राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शीघ्र ही इस नवीनीकृत परिसर का उद्घाटन कर सकती हैं।

वर्ष 1894 में ब्रिटिश काल के दौरान स्थापित यह संस्था लंबे समय से बांग्ला साहित्य, पांडुलिपियों और दुर्लभ दस्तावेजों के संरक्षण का प्रमुख केंद्र रही है। आधुनिकीकरण के तहत संग्रहालय में आधुनिक गैलरियां, उन्नत प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षित प्रदर्शन प्रणाली विकसित की गई है। यहां गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर के विवाह निमंत्रण पत्र जैसी ऐतिहासिक धरोहरें तथा पुरातत्वविद् रखालदास बंद्योपाध्याय से जुड़ी सामग्री संरक्षित है।

राज्य सरकार के सहयोग से भवन की मरम्मत, दीर्घाओं का पुनर्संरचना और पुस्तकालय के विशाल संग्रह का डिजिटलीकरण किया गया है। पुस्तकालय में एक लाख से अधिक पुस्तकें और हजारों दुर्लभ पत्रिकाएं उपलब्ध हैं, जिन्हें अब डिजिटल माध्यम से भी देखा जा सकेगा। परिषद के अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और साहित्य प्रेमियों को बड़ी सुविधा मिलेगी।

उद्घाटन के बाद संग्रहालय आम नागरिकों के लिए औपचारिक रूप से खोल दिया जाएगा। यह पहल बंगाल की समृद्ध साहित्यिक विरासत को नई पीढ़ी के सामने आधुनिक रूप में प्रस्तुत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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