सीएम बनीं 'संकटमोचक': नदिया की मेधावी छात्रा को रातों-रात जारी हुआ एडमिट कार्ड

तकनीकी खामियों के कारण अधर में लटका था छात्रा का भविष्य; मुख्यमंत्री और अभिषेक बनर्जी के हस्तक्षेप के बाद मिली राहत
CM becomes the "problem solver": The meritorious student from Nadia received her admit card overnight.
दत्तपुलिया यूनियन एकेडमी फॉर गर्ल्स की छात्रा शर्मिष्ठा प्रमाणिक
Published on

निधि, सन्मार्ग संवाददाता

नदिया : पश्चिम बंगाल के नदिया जिले से मानवीय संवेदनाओं और प्रशासनिक मुस्तैदी की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने पूरे राज्य का ध्यान अपनी ओर खींचा है। दत्तपुलिया यूनियन एकेडमी फॉर गर्ल्स की एक होनहार छात्रा, जिसका माध्यमिक परीक्षा का सपना तकनीकी जटिलताओं के कारण टूटने की कगार पर था, उसे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और सांसद अभिषेक बनर्जी की व्यक्तिगत पहल के बाद नया जीवनदान मिला है। यह मामला उस समय गंभीर हो गया जब माध्यमिक परीक्षा (कक्षा 10वीं) शुरू होने के ऐन पहले छात्रा को पता चला कि उसका एडमिट कार्ड जारी नहीं हुआ है। छात्रा ने समय पर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी की थी, लेकिन किन्हीं अज्ञात तकनीकी और विभागीय त्रुटियों के कारण उसका प्रवेश पत्र सरकारी दफ्तरों की फाइलों में ही अटका रह गया। परीक्षा से ठीक पहले एडमिट कार्ड न मिलना किसी भी छात्र के लिए एक भयावह सपना होता है। इस खबर के मिलते ही छात्रा और उसके परिजन गहरे मानसिक आघात में चले गए थे और उन्हें अपना एक पूरा साल बर्बाद होता नजर आ रहा था।

प्रशासनिक तत्परता और 'देवदूत' बनीं मुख्यमंत्री

छात्रा की इस लाचारी को देखते हुए विद्यालय की प्रधानाध्यापिका रूपा पाल और स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष व पूर्व विधायक समीर कुमार पोद्दार ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई। उन्होंने इस संकट की गंभीरता को समझा और इसे केवल एक कागजी कार्यवाही न मानकर सीधे राज्य के शीर्ष नेतृत्व तक पहुँचाया।

जैसे ही यह मामला मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और सांसद अभिषेक बनर्जी के संज्ञान में आया, उन्होंने बिना समय गंवाए इसे अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा। मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी छात्र का भविष्य विभागीय लापरवाही की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए। मुख्यमंत्री की कड़ी हिदायत और व्यक्तिगत रुचि का असर यह हुआ कि पश्चिम बंगाल मध्य शिक्षा परिषद (WBBSE) ने युद्ध स्तर पर काम किया। रातों-रात तकनीकी खामियों को दूर किया गया और विशेष व्यवस्था के तहत छात्रा के लिए नया एडमिट कार्ड जारी कर दिया गया। यह केवल एक प्रशासनिक सुधार नहीं था, बल्कि उन जटिलताओं पर मानवीय संवेदनाओं की बड़ी जीत थी जो अक्सर छात्रों के भविष्य की राह में रोड़ा बन जाती हैं।

छात्र के घर लौटी मुस्कान

अब वह छात्रा बिना किसी डर और बाधा के परीक्षा केंद्र पहुँचकर अपनी परीक्षा दे पा रही है। इस सुखद अंत के बाद छात्रा के माता-पिता की आँखों में खुशी के आँसू थे। उन्होंने और स्कूल प्रशासन ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की है। यह घटना साबित करती है कि यदि देश और राज्य का नेतृत्व संवेदनशील हो, तो कोई भी तकनीकी बाधा किसी विद्यार्थी के सपनों को नहीं कुचल सकती।

संबंधित समाचार

No stories found.

कोलकाता सिटी

No stories found.

खेल

No stories found.
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in