

नीट (NEET) प्रदर्शनकारी छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी FIR रद्द कर दी हैं। इसके लिए शीर्ष अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल किया। कोर्ट ने साफ कहा है कि अब छात्रों पर कोई नया मुकदमा दर्ज नहीं होगा। इसके साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि इन विरोध प्रदर्शनों को लेकर छात्रों के खिलाफ देश के किसी भी हिस्से में कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी और न ही पुरानी जांच को आगे बढ़ाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की तरफ से तीन भरोसे को पूरा करने की प्रतिबद्धता जताए जाने के बाद सीजेपी ने 5 सितंबर को प्रस्तावित प्रदर्शन वापस लेने की घोषणा कर दी है।
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली, पश्चिम बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र और असम जैसे राज्यों में प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज मामलों पर रोक लगा दी है। अदालत ने कहा कि 20 से 25 जुलाई के दौरान जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में हुए आंदोलन के सिलसिले में यदि किसी अन्य राज्य में भी एफआईआर दर्ज हैं, तो उन पर जांच तुरंत बंद की जाए ।
2,873 लोगों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी
अदालत के इस रुख के बाद करीब 129 मुकदमों पर कानूनी कार्रवाई का रास्ता बंद हो गया है । हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि दिल्ली पुलिस केवल उन 2,873 लोगों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया जारी रख सकेगी, जिनका पहले से गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। सामान्य छात्रों को किसी भी तरह से प्रताड़ित नहीं किया जाएगा।
आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा
परीक्षा के तनाव में जान गंवाने वाले छात्रों के लिए कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि 3 महीने के भीतर मुआवजे की नीति तैयार की जाए और तय समय के अंदर पीड़ित परिवारों को आर्थिक मदद दी जाए।
'बातचीत से हल हो सकता है हर मसला' : मुख्य न्यायाधीश
सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों को आपसी तालमेल और संवाद बनाए रखने की सलाह दी. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा, 'यदि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर भरोसा दिखाएं, तो सभी मसलों को एक-एक करके सुलझाया जा सकता है। दुनिया में ऐसी कोई समस्या नहीं है, जिसका समाधान खुले दिमाग से बैठकर चर्चा करने से न निकले। '
छात्र संगठन ने 5 सितंबर का मार्च वापस लिया
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद छात्रों ने अपना आंदोलन रोक दिया है। सीजेपी के सह-संयोजक सौरभ दास ने कहा कि वे अदालत के आदेश का सम्मान करते हैं, इसलिए 5 सितंबर को होने वाला देशव्यापी मार्च अब नहीं होगा । उन्होंने इस मामले में मदद के लिए कोर्ट और वकीलों का आभार जताया।
20 जुलाई को छात्र और पुलिस के बीच हुई थी झड़प
सीजेपी के नेतृत्व में 20 जून को जंतर-मंतर पर आंदोलन शुरू हुआ था। एक महीने बाद 20 जुलाई को दिल्ली में संसद की ओर बढ़ रहे छात्रों की पुलिस से झड़प हो गई, भीड़ को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े थे। छात्र कह रहे थे कि सबसे पहले तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान दें। सरकार द्वारा मांगें माने जाने के बाद 25 जुलाई को यह आंदोलन खत्म हो गया था।