

‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ जैसे शब्दों को लेकर उठे विवाद के बीच भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया और उनका इरादा युवाओं की आलोचना करना नहीं था।
सीजेआई ने साफ किया कि उनका बयान उन लोगों के खिलाफ था जो फर्जी डिग्री के जरिए वकालत, मीडिया और अन्य सम्मानित पेशों में प्रवेश कर जाते हैं और योग्य युवाओं के अवसर छीनते हैं। उन्होंने ऐसे लोगों को समाज के लिए ‘परजीवी’ बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें भारत की युवा पीढ़ी पर गर्व है और वे उन्हें देश की असली ताकत मानते हैं। उनके मुताबिक, हर युवा उन्हें प्रेरित करता है और देश के भविष्य का आधार है।
दरअसल, 15 मई को एक सुनवाई के दौरान सीजेआई एक याचिकाकर्ता पर नाराज हो गए थे, जो खुद को ‘वरिष्ठ वकील’ का दर्जा न मिलने की शिकायत कर रहा था। इस दौरान उन्होंने बार काउंसिल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और फर्जी डिग्री वाले लोगों के पेशे में आने को लेकर चिंता जताई थी।
उसी दौरान दिए गए उनके बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया था, जिसमें कुछ लोगों ने इसे बेरोजगार युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं का अपमान बताया। हालांकि अब उन्होंने साफ कर दिया है कि उनका निशाना केवल गलत तरीके से पेशों में घुसने वाले लोग थे, न कि देश के युवा।