

सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजयपुरम: सीटू अंडमान एवं निकोबार राज्य समिति ने द्वीपों के महाविद्यालय छात्रों द्वारा चलाए जा रहे संयुक्त आंदोलन को अपना मजबूत समर्थन और एकजुटता व्यक्त की है। यह हड़ताल एसएफआई, एनएसयूआई और एबीवीपी द्वारा संयुक्त रूप से संचालित की जा रही है। छात्र भारत सरकार द्वारा जारी 8 मार्च 2024 की राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से सातों महाविद्यालयों को नवस्थापित डीम्ड विश्वविद्यालय के अधीन लाने के निर्णय की समीक्षा की मांग कर रहे हैं। वर्तमान में ये महाविद्यालय पांडिचेरी विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं।
सीटू ने कहा कि केंद्र सरकार का यह निर्णय एकतरफा है और छात्र संगठनों, शिक्षक संघों, कर्मचारी संगठनों तथा निर्वाचित प्रतिनिधियों से कोई परामर्श नहीं किया गया। उनका आरोप है कि इस तरह के निर्णय से शुल्क वृद्धि, सुविधाओं की कमी और शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, डीम्ड विश्वविद्यालय द्वारा जारी प्रमाणपत्रों का रोजगार बाजार में मूल्य कम होने का खतरा भी है।
समिति ने इसे उच्च शिक्षा के निजीकरण और व्यावसायीकरण की नीति का हिस्सा बताते हुए सरकार के कदम की निंदा की। सीटू ने स्पष्ट किया कि छात्र आंदोलन केवल उनके अधिकारों और शैक्षणिक हितों की रक्षा के लिए है। समिति ने केंद्र सरकार से छात्रों के साथ सार्थक और पारदर्शी संवाद स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सीटू ने पुनः छात्रों के संघर्ष के प्रति अपनी एकजुटता व्यक्त की और कहा कि यह समर्थन छात्रों की मांगों को न्यायसंगत समाधान तक पहुँचाने के लिए है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से लिया जाए और उनके शैक्षणिक भविष्य की रक्षा की जाए।
अंडमान-निकोबार के सात महाविद्यालयों के छात्र लगातार यह संकेत दे रहे हैं कि वे डीम्ड विश्वविद्यालय के अधीन लाए जाने के प्रस्ताव को लेकर संशय में हैं। उनके अनुसार, बिना पूर्व परामर्श और स्पष्ट संवाद के यह निर्णय उनके शैक्षणिक और पेशेवर हितों को प्रभावित कर सकता है।
छात्रों और सीटू का यह आंदोलन यह दर्शाता है कि द्वीपसमूह में शिक्षा के निजीकरण और केंद्रीकृत नियंत्रण के प्रस्तावों के खिलाफ व्यापक स्तर पर विरोध मौजूद है। दोनों पक्षों के बीच संवाद और सहयोग ही इस विवाद का समाधान कर सकता है।