

निधि, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता: भीषण गर्मी की शुरुआत के साथ ही शहर में तैराकी (Swimming) का सीजन शुरू हो चुका है। आमतौर पर मार्च में सभी स्विमिंग पूल खुल जाते हैं, लेकिन इस बार तैराकों के लिए एक परेशान करने वाली खबर है। जल शोधन के लिए आवश्यक रसायनों, विशेष रूप से क्लोरीन (Chlorine) की भारी किल्लत के कारण शहर के कई प्रमुख स्विमिंग पूल बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं।
पूल संचालकों का दावा है कि इस संकट की मुख्य जड़ पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष (West Asia Conflict) है। इस युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे क्लोरीन आधारित कीटाणुनाशकों (Disinfectants) का आयात बाधित हो गया है। क्लोरीन के बिना पूल के पानी को स्वच्छ और सुरक्षित रखना असंभव है, जिसके कारण जनस्वास्थ्य के जोखिम को देखते हुए कई क्लबों ने पूल बंद रखने का फैसला किया है।
इस संकट के बीच बाजार में कुछ 'अजीब' रसायनों के नाम भी तैर रहे हैं, जिससे क्लब प्रबंधन और जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। 'फुलसोडियम क्लोरेट' (Foolsodium Chlorate), 'फैटस मैक्सिमस स्टेबलाइजर' (Fattus Maximus Stabilizer) और 'प्रैंकियम हाइड्रोक्साइड' (Prankium Hydroxide) जैसे नामों को लेकर विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन नामों का वास्तव में कोई अस्तित्व नहीं है और यह महज भ्रामक जानकारी (Misinformation) का हिस्सा हो सकते हैं।
आपूर्तिकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो रसायनों की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिससे तैराकी प्रशिक्षण का खर्च भी बढ़ जाएगा। क्लोरीन पानी में मिलकर हाइपोक्लोरस एसिड (Hypochlorous Acid) बनाता है, जो बैक्टीरिया और शैवाल को खत्म करता है। इसके बिना पूल का उपयोग करना त्वचा रोगों और संक्रमण का कारण बन सकता है। फिलहाल, तैराकों को सलाह दी गई है कि वे केवल प्रमाणित और सुरक्षित रसायनों वाले पूल का ही उपयोग करें।