53वीं वार्षिक कला प्रदर्शनी में बच्चों ने बिखेरी कला की चमक

नेहरू चिल्ड्रेन म्यूजियम में रंगों और कल्पनाओं की अनोखी दुनिया
53वीं वार्षिक कला प्रदर्शनी में बच्चों ने बिखेरी कला की चमक
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सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : नेहरू चिल्ड्रेन म्यूजियम के पेंटिंग डिविजन द्वारा आयोजित 53वीं वार्षिक कला प्रदर्शनी ‘एग्जिबिशन’ का शुभारंभ शनिवार को उत्साहपूर्ण माहौल के बीच म्यूजियम परिसर में हुआ। प्रदर्शनी की शुरुआत होते ही बड़ी संख्या में अभिभावक, विद्यार्थी, कला–प्रेमी और शुभचिंतक वहां पहुंचने लगे। हर चेहरे पर बच्चों की कला–प्रतिभा को देखने की उत्सुकता साफ झलक रही थी। रंग–बिरंगी दीवारों पर सजी बच्चों की पेंटिंग्स ने वातावरण को और भी जीवंत बना दिया। इस प्रदर्शनी में विभिन्न आयु वर्ग के विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई सैकड़ों पेंटिंग्स को प्रदर्शित किया गया है। इन चित्रों में प्रयुक्त रंगों का संयोजन, कल्पनाशीलता, विषयों की विविधता और बाल–मन की गहराई को दर्शाने वाली सहज अभिव्यक्ति दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित कर रही है। कुछ चित्र प्रकृति की सुंदरता को दर्शाते हैं, तो कुछ में सामाजिक संदेश शामिल हैं। कई बच्चों ने आधुनिक तकनीक, अंतरिक्ष व लोक–संस्कृति से प्रेरित रचनाएँ भी प्रस्तुत की हैं। छोटे–छोटे कलाकारों की प्रतिभा और मेहनत ने आगंतुकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम में कई सम्मानित अतिथि भी उपस्थित थे। इनमें मिस स्वस्तिका दत्ता (आनंदराम जयपुरिया कॉलेज), मिस आयुषी मुखर्जी (साउथ प्वाइंट हाई स्कूल, कक्षा–III) और मिस अभीप्सा साहा (लोरेटो डे स्कूल, कक्षा–II) शामिल रहीं। सभी अतिथियों ने बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए उनकी कलाकृतियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कला बच्चों की सोच को नई दिशा देती है और उनकी अभिव्यक्ति को मजबूत बनाती है। अतिथियों ने प्रदर्शनी का औपचारिक उद्घाटन भी किया।

म्यूजियम के डायरेक्टर सुदीप श्रीमल ने इस अवसर पर बताया कि नेहरू चिल्ड्रेन म्यूजियम में यह वार्षिक प्रदर्शनी पिछले कई वर्षों से आयोजित की जा रही है। उनका कहना था कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य बच्चों में पेंटिंग के प्रति रुचि विकसित करना, उन्हें कला के विभिन्न आयामों से परिचित कराना और उनकी रचनात्मकता को मंच देना है। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रदर्शनी से जुड़े बच्चे न केवल आत्मविश्वास बढ़ाते हैं, बल्कि बड़े स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने का अवसर भी प्राप्त करते हैं। श्रीमल के अनुसार, कला बच्चों के व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह उन्हें संवेदनशील तथा सकारात्मक बनाती है।

प्रदर्शनी का माहौल हर तरफ उत्साह, रचनात्मकता और उमंग से भरपूर था। माता–पिता अपने बच्चों की कला देखकर गर्व महसूस कर रहे थे, वहीं बच्चे अपनी पेंटिंग्स को लोगों के सामने देखकर उत्साहित थे। कुल मिलाकर, 53वीं वार्षिक कला प्रदर्शनी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बच्चों की कल्पनाशक्ति और रचनात्मकता किसी से कम नहीं। यह आयोजन न केवल बच्चों की प्रतिभा को सामने लाता है, बल्कि समाज में कला के महत्व को भी रेखांकित करता है।

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