मशहूर शेफ दामू का 72 साल की उम्र में निधन, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने जताया शोक

‘कुकू विद कोमाली’ से घर-घर में पहचान बनाने वाले के. दामोदरन ने 2010 में सबसे लंबे व्यक्तिगत पाककला मैराथन का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था। उन्हें 2025 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था
मशहूर शेफ दामू का 72 साल की उम्र में निधन, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने जताया शोक
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मशहूर सेलिब्रिटी शेफ के. दामोदरन, जिन्हें दुनिया भर में शेफ दामू के नाम से जाना जाता था, का 72 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने 25 अक्टूबर को चेन्नई में अंतिम सांस ली। तमिल टेलीविजन के लोकप्रिय कुकिंग शो ‘कुकू विद कोमाली’ में अपनी मौजूदगी से घर-घर में पहचान बनाने वाले शेफ दामू के निधन पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने शोक जताया। पाककला के क्षेत्र में उनके योगदान और टेलीविजन के माध्यम से खाना बनाने की कला को आम लोगों तक पहुंचाने के प्रयासों को याद किया जा रहा है। उनके निधन की खबर से पाककला जगत और उनके प्रशंसकों में शोक है। हालांकि, उनके निधन के कारण की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

मुख्यमंत्री विजय ने दी श्रद्धांजलि

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने शेफ दामू के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनका जाना पाककला के क्षेत्र के लिए बड़ी क्षति है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी संदेश में उनके पाककला कौशल, अनूठे अंदाज और टेलीविजन कार्यक्रमों के जरिए खाना बनाने की कला को लोगों तक पहुंचाने के प्रयासों को याद किया गया। विजय ने यह भी उल्लेख किया कि शेफ दामू ने वर्ष 2010 में सबसे लंबे व्यक्तिगत पाककला मैराथन का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था। उन्हें वर्ष 2025 में पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया था। मुख्यमंत्री ने उनके परिवार, मित्रों और प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

‘कुकू विद कोमाली’ से मिली घर-घर में पहचान

शेफ दामू तमिल टेलीविजन के लोकप्रिय कुकिंग रियलिटी शो ‘कुकू विद कोमाली’ के कारण व्यापक रूप से पहचाने गए। इस कार्यक्रम में खाना बनाने की चुनौती के साथ हास्य और मनोरंजन का मेल देखने को मिलता है। शो में निर्णायक की भूमिका निभाते हुए दामू अपने सहज व्यवहार, मुस्कान और पाककला के व्यावहारिक ज्ञान के कारण दर्शकों के पसंदीदा बन गए थे।

उनकी खासियत यह थी कि वह पेशेवर पाककला की बारीकियों को सरल अंदाज में समझाते थे। उनके व्यक्तित्व ने खाना बनाने जैसे विषय को मनोरंजक बनाया और दर्शकों को तमिल व्यंजनों तथा पाक परंपराओं से जोड़ने में मदद की। टेलीविजन पर उनकी लोकप्रियता केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रही। उन्होंने कई खाना बनाने से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लिया और निर्णायक के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई। उनके प्रशंसकों के लिए वह केवल एक मशहूर शेफ नहीं, बल्कि ऐसा चेहरा थे, जिसने पाककला को मनोरंजन का हिस्सा बना दिया।

2010 में बनाया था गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

शेफ दामू की उपलब्धियों में सबसे उल्लेखनीय उनका गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड था। दिसंबर 2010 में उन्होंने 24 घंटे, 30 मिनट और 12 सेकंड तक खाना बनाते हुए कुल 617 व्यंजन तैयार किए थे। इन व्यंजनों का कुल वजन लगभग 190 किलोग्राम था। इस उपलब्धि ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। हालांकि, उनका योगदान केवल रिकॉर्ड बनाने तक सीमित नहीं था। उन्होंने अलग-अलग आयोजनों में बड़े पैमाने पर खाना तैयार करने की चुनौती भी स्वीकार की।

उन्होंने मदुरै में लगभग 14.7 मीटर लंबा डोसा तैयार किया था। इसके अलावा, सिंगापुर में दुनिया की सबसे बड़ी करी तैयार करने के आयोजन में भी भाग लिया था। इन उपलब्धियों ने उनकी रचनात्मकता, पाककला में दक्षता और बड़े आयोजनों में काम करने की क्षमता को सामने रखा।

होटल प्रबंधन की पढ़ाई से शुरू हुआ सफर

के. दामोदरन का जन्म 1954 में हुआ था। उन्होंने चेन्नई स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट से पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने तमिलनाडु पर्यटन विकास निगम में प्रबंधन प्रशिक्षु के रूप में काम शुरू किया। इसी दौरान उन्होंने पाककला के क्षेत्र में अपना अनुभव और कौशल विकसित किया। समय के साथ उन्होंने खाना बनाने की अपनी शैली और ज्ञान के जरिए अलग पहचान बनाई। टेलीविजन पर उनकी लोकप्रियता ने उनके अनुभव को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाया। उन्होंने पारंपरिक व्यंजनों और पेशेवर खाना बनाने की तकनीकों को लोगों के सामने सरल तरीके से प्रस्तुत किया।

2025 में मिला पद्मश्री सम्मान

पाककला के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने जनवरी 2025 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था। यह सम्मान उनके लंबे करियर और खाना बनाने की कला को लोकप्रिय बनाने के प्रयासों की पहचान था। शेफ दामू ने पाककला को केवल पेशेवर रसोई तक सीमित नहीं रखा, बल्कि टेलीविजन के जरिए इसे आम लोगों के जीवन का हिस्सा बनाया। उनके रिकॉर्ड, टेलीविजन कार्यक्रमों और विभिन्न पाक आयोजनों में भागीदारी ने उन्हें अलग पहचान दिलाई। उनके निधन से पाककला जगत ने एक अनुभवी कलाकार खो दिया है। वहीं, टेलीविजन दर्शकों के लिए उनकी मुस्कान, खाना बनाने का अंदाज और ‘कुकू विद कोमाली’ में उनकी भूमिका लंबे समय तक यादगार रहेगी।

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