

स्कूलों में पारदर्शी तरीके से होगी खेल शिक्षकों की भर्ती
मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार पर शिक्षा व्यवस्था की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार की प्राथमिकताएं प्रशासनिक कामकाज और स्कूलों के विकास के बजाय उत्सवों, मेलों और चुनिंदा भत्तों तक सीमित थीं। इसका सीधा असर राज्य के स्कूलों की स्थिति पर पड़ा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार तुष्टीकरण की राजनीति से दूर रहते हुए सभी समुदायों के विकास के लिए समान और निष्पक्ष तरीके से काम करेगी। उन्होंने शिक्षा के स्तर में तेजी से सुधार लाने के साथ-साथ विद्यार्थियों के शारीरिक और मानसिक विकास पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री ने राज्य के युवाओं को खेल के क्षेत्र में बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए उत्तर बंगाल और पश्चिमी क्षेत्र में अत्याधुनिक ‘खेलों में उत्कृष्टता केंद्र’ स्थापित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ खेल भी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके अलावा स्कूलों में खाली पड़े ट्रेनर, खेल शिक्षक और शारीरिक प्रशिक्षक के पदों पर स्कूल सेवा आयोग के माध्यम से पारदर्शी तरीके से भर्ती की जाएगी। मुख्यमंत्री ने स्कूलों में फुटबॉल, खो-खो और हडुडु जैसे पारंपरिक भारतीय खेलों को बढ़ावा देने के साथ ‘व्रताचारी’ आंदोलन को फिर से शुरू करने पर भी जोर दिया। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे विद्यार्थियों को शिक्षा और खेल, दोनों क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए तैयार करें, ताकि वे राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।
मित्रा इंस्टीट्यूशन में छात्र को सांप काटने की घटना पर जताई चिंता
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कोलकाता के मित्रा इंस्टीट्यूशन में एक छात्र को सांप के डंसने की घटना पर भी गहरी चिंता जताई। उन्होंने घटना को अकल्पनीय बताते हुए स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के कार्यकाल में स्कूलों को लगातार तीन वर्षों से ‘कंपोजिट ग्रांट’ की राशि नहीं मिली। उन्होंने कहा कि भले ही यह राशि बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन स्कूलों के रोजमर्रा के रखरखाव और सुरक्षा के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने दावा किया कि धनराशि उपलब्ध नहीं होने के कारण कई स्कूल ब्लीचिंग पाउडर और कार्बोलिक एसिड जैसी आवश्यक वस्तुएं तक खरीद पाने की स्थिति में नहीं हैं। इससे स्कूल परिसरों में बच्चों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है।