

कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चुनाव आयोग में चल रही कानूनी लड़ाई के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार की एक टिप्पणी ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय मीडिया सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता कि असली तृणमूल कौन है और नकली तृणमूल कौन।" हालांकि उन्होंने विवाद पर कोई औपचारिक टिप्पणी करने से परहेज किया, लेकिन उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी, दोनों गुट चुनाव आयोग के समक्ष पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अपना-अपना दावा पेश कर चुके हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर लगाए गए बूथ कैप्चरिंग और चुनावी धांधली के आरोपों को भी सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा, "अगर बूथ कैप्चरिंग या बूथ जैमिंग हुई होती, तो 93.7 प्रतिशत मतदान संभव नहीं होता।" उनके अनुसार, रिकॉर्ड मतदान प्रतिशत चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता का प्रमाण है।
ज्ञानेश कुमार ने कहा कि चुनाव आयोग ने पूरे चुनाव के दौरान संविधान और कानून के दायरे में रहकर पूरी निष्पक्षता से कार्य किया। विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर हुई आलोचनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आयोग ने किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्ति के दबाव में कोई निर्णय नहीं लिया। उनके अनुसार, आयोग का हर फैसला केवल संवैधानिक प्रावधानों और कानून के अनुरूप लिया गया।