महू : रक्षा प्रमुख (सीडीएस) अनिल चौहान ने मंगलवार को कहा कि भारत हमेशा शांति का समर्थक रहा है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम शांतिवादी हैं। शांति बनाये रखने के लिए शक्ति आवश्यक है। क्योंकि शक्ति के बिना शांति केवल सपना है। भारत की नयी रक्षा प्रणाली ‘सुदर्शन चक्र’ को भारत की ‘ढाल और तलवार’ बताते हुए जनरल चौहान ने कहा कि दुश्मन गलतफहमी में न रहे, देश की सेनाएं युद्ध के लिए हमेशा तैयार हैं।
‘अगर शांति चाहते हो, तो युद्ध के लिए तैयार रहो’
सीडीएस ने मध्य प्रदेश के महू में आयोजित ‘रण संवाद’ सेमिनार में देश की सुरक्षा रणनीति और भविष्य की चुनौतियों पर अपने संबोधन में लैटिन कहावत ‘अगर शांति चाहते हो, तो युद्ध के लिए तैयार रहो’ का उल्लेख करते हुए उक्त टिप्पणी की। उन्होंने भारत की नयी रक्षा प्रणाली ‘सुदर्शन चक्र’ को ऐसा ‘कवच और तलवार’ बताया, जो भारत के सामरिक, नागरिक और राष्ट्रीय महत्व के स्थानों की सुरक्षा के लिए ढाल और हथियार का काम करेगा।
2035 तक पूरी तरह लागू हो जायेगा ‘सुदर्शन चक्र’
उन्होंने कहा कि ‘सुदर्शन चक्र’, जिसे भारत का ‘गोल्डन डोम’ या ‘आयरन डोम’ कहा जा रहा है, 2035 तक पूरी तरह लागू हो जायेगा। यह प्रणाली दुश्मन के हवाई हमलों का पता लगाने, ट्रैक करने और निष्प्रभावी करने के लिए मजबूत ढांचे पर आधारित होगी। इसमें सॉफ्ट स्किल्स, काइनेटिक हथियार और डायरेक्ट एनर्जी हथियार शामिल होंगे। यह प्रणाली भारत की रक्षा रणनीति को नयी दिशा देगी, जो रक्षा के साथ-साथ जवाबी हमले की क्षमता भी रखेगी। यह कवच निगरानी, साइबर सुरक्षा और वायु रक्षा प्रणालियों को मिलाकर कई स्तरों की सुरक्षा प्रदान करेगा ताकि लंबी दूरी की मिसाइलों, विमानों और मानवरहित हवाई वाहनों जैसे खतरों का पता लगाकर उन्हें नष्ट किया जा सके।
जॉइंटमैनशिप अब भारत की सैन्य ताकत का आधार
‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए सीडीएस ने कहा कि यह एक आधुनिक संघर्ष था, जिससे कई महत्वपूर्ण सबक मिले। कई सुधार लागू किये जा चुके हैं और कुछ पर काम जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘रण संवाद’ का उद्देश्य ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा नहीं बल्कि भविष्य की रणनीतियों पर ध्यान देना है। उन्होंने भविष्य के युद्धों की बदलती प्रकृति पर जोर देते हुए कहा कि अब युद्ध केवल जमीन, जल और वायु तक सीमित नहीं रहेंगे बल्कि साइबर और अंतरिक्ष क्षेत्रों तक विस्तारित होंगे। ऐसे में भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच संयुक्त रणनीति और तालमेल जरूरी है। उन्होंने कहा कि जॉइंटमैनशिप अब विकल्प नहीं बल्कि भारत की सैन्य ताकत का आधार है।