हावड़ा की रामनवमी को लेकर दायर मामला खारिज

हाई कोर्ट की जस्टिस चैताली दास दे ने दिया आदेश
हाई कोर्ट की फाइल फोटो
हाई कोर्ट की फाइल फोटो
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सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : हावड़ा के रामनवमी जुलूस को लेकर दायर मामले को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। जस्टिस चैताली दास दे ने शुक्रवार को मामले की सुनवायी के बाद यह आदेश दिया। इस मामले में हावड़ा के सीजेएम के कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई है। हाई कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करायी गई थी। इनकी जांच के बाद चार्जशीट दाखिल की गई थी।

एडवोकेट अनिन्द्य सुंदर दास ने बताया कि विश्व हिंदू परिषद की तरफ से यह जुलूस 2024 के अप्रैल में निकाला गया था। पुलिस की अनुमति नहीं मिलने के बाद हाई कोर्ट में रिट दायर की गई थी। हाई कोर्ट ने शर्तों के साथ अनुमति दी थी। मसलन जुलूस में तीन सौ से अधिक लोग हिस्सा नहीं ले पाएंगे। दूसरी तरफ अप्रैल में निकाले गए इस जुलूस में हजारों हजारों लोग शामिल हो गए थे। इसका हवाला देते हुए विश्व हिंदू परिषद की कमेटी के सदस्यों के खिलाफ थाने में एफआईआर दर्ज करायी गई थी। इसके बाद हावड़ा के सीजेएम के कोर्ट में चार्जशीट भी दाखिल कर दी गई। एडवोकेट दास ने बताया कि इसके खिलाफ हाई कोर्ट में रिट दायर कर के एफआईआर को खारिज करने की अपील की गई थी। पीटिशनर की दलील थी कि जुलूस की शुरुआत तो तीन सौ लोगों के साथ ही की गई थी। अब सड़क पर खड़े लोग हजारों की तादाद में इसमें शामिल हो गए तो कमेटी भला उन्हें कैसे रोक सकती थी। यह जिम्मेदारी तो प्रशासन की थी और प्रशासन इस मामले में नाकाम रहा था। हाई कोर्ट ने माइक और लाउड स्पीकर के इस्तेमाल को लेकर भी कुछ शर्तें लगायी थी। इसका उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करायी गई थी। एडवोकेट दास की दलील थी कि इस मामले में जब लाउड स्पीकर और बॉक्स आदि सीज ही नहीं किया गया था तो फिर किस आधार पर एफआईआर दर्ज करायी गई थी। सीजर के बगैर मामला कैसे बनता है। जस्टिस चैताली दास ने सभी पक्षों को सुनने के बाद एफआईआर को खारिज करने का आदेश दिया। इसके साथ ही आपराधिक मामला भी खारिज हो गया।

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