

जबकि 2010 में हो गई थी मौत
जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : हाई कोर्ट ने एक डॉक्टर के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को खारिज कर दिया है। उसके खिलाफ लोअर कोर्ट में एक मामला दायर किया गया था। जस्टिस अजय कुमार गुप्त ने यह आदेश दिया है। लोअर कोर्ट में दायर मामले के मुताबिक डॉक्टर तापस कुमार बनर्जी ने पेटीशनर के चाचा को धमकी दी थी।
जस्टिस गुप्त ने टिप्पणी करते हुए कहा कि एक ऐसे अभियुक्त के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था जिसका 2010 में निधन हो चुका था। उसके खिलाफ आरोप है कि उसने 2018 में धमकी दी थी। जस्टिस गुप्त ने कहा कि यह असंभव है। मरने के आठ साल बाद भला कोई व्यक्ति धमकी कैसे दे सकता है। उन्होंने कहा कि अगर इस आपराधिक मामले को जारी रखा जाता है तो यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। डॉक्टर गौर दास ने यह रिवीजन पिटिशन दायर किया था। यह मामला संपत्ति के एक विवाद से जुड़ा है। इस संपत्ति को लेकर 2010 में एक ट्रस्ट बनाया गया था। उस संपत्ति के वास्तविक मालिक के भतीजी ने आरोप लगाया था यह ट्रस्ट फर्जी दस्तावेज के आधार पर बनाया गया है। इस बाबत आपराधिक मामला 2018 में दर्ज किया गया था। इसमें डॉक्टर तापस कुमार बनर्जी को भी अभियुक्त बनाया गया था जिनका निधन 2010 में हो गया था। मजे की बात तो यह है कि डॉक्टर बनर्जी को अभियुक्त नंबर एक बनाया गया था। सिर्फ इतना ही नहीं मजिस्ट्रेट ने भी इस मामले में डॉक्टर बनर्जी के खिलाफ सम्मन जारी कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि यह एक सिविल मामला है और इसे आपराधिक रंग दिया गया है। कोर्ट ने पेटीशनर के खिलाफ दायर आपराधिक मामले को खारिज कर दिया।