बस मालिकों ने दी सेवाएं ठप करने की चेतावनी !

फास्टैग के नए नियम: 1 अप्रैल से टोल का बोझ और कैशलेस व्यवस्था का जता रहे विरोध
Bus Owners Warn of Halting Services!
फाइल फोटो REP
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निधि, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता: राष्ट्रीय राजमार्गों (NH) पर सफर करना अब और महंगा होने वाला है। आगामी 1 अप्रैल से फास्टैग (FASTag) और टोल प्लाजा के नियमों में बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। नए वित्तीय वर्ष से व्यक्तिगत चार पहिया वाहनों के लिए वार्षिक पास की दर 3000 रुपये से बढ़ाकर 3075 रुपये कर दी गई है। साथ ही, उसी दिन से टोल प्लाजा पर नकद लेनदेन (Cash Transaction) पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा, हालांकि इसका कुछ परिवहन संगठनों ने विरोध जताया है।

बस मालिकों की बढ़ी चिंता

नेशनल हाईवे अथॉरिटी के इस फैसले का सबसे कड़ा विरोध बस मालिकों की ओर से हो रहा है। 'वेस्ट बंगाल बस-मिनीबस ओनर्स एसोसिएशन' का दावा है कि नकद लेनदेन बंद होने से बस चालक बड़ी मुसीबत में पड़ जाएंगे। वर्तमान में बस कर्मी सुबह एक बार टोल देकर पूरे दिन का पास प्राप्त करते हैं, लेकिन अब यूपीआई (UPI) या फास्टैग अनिवार्य होने से न केवल प्रक्रिया जटिल होगी, बल्कि खर्च भी बढ़ेगा। एसोसिएशन के अनुसार, डिजिटल भुगतान पर करीब 1.25% अतिरिक्त चार्ज देना होगा, जिसे वहन करना स्थानीय रूट की बसों के लिए नामुमकिन है।

मांगें नहीं मानीं तो थमेंगे बसों के पहिए

एसोसिएशन के महासचिव प्रदीप नारायण बोस ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 1 अप्रैल से नकद लेनदेन बंद करने का निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो वे अपनी बसें टोल प्लाजा से पार नहीं कराएंगे। उनकी प्रमुख मांगें हैं कि रूट बसों को 'छूट प्राप्त' श्रेणी (Exempted Category) में रखा जाए। टोल शुल्क में बढ़ोतरी न की जाए। एनएच पर ऑटो, टोटो और वैन जैसे धीमी गति के वाहनों का प्रवेश बंद हो। सर्विस रोड पर ट्रकों की अवैध पार्किंग रोकी जाए और बसों के लिए टोल पर अलग लेन हो। प्रदीप नारायण बोस ने कहा, "अगर यह निर्देश लागू रहता है, तो हमारे पास सेवाएं बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। इससे यात्रियों को होने वाली असुविधा के लिए पूरी तरह से राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण जिम्मेदार होगा।"

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