सगी बहन की हत्या करने वाले भाई को उम्रकैद, 9 साल बाद मिला न्याय

Brother who murdered his own sister sentenced to life imprisonment; justice served after 9 years.
दोषी भाई को कोर्ट ने दी उम्रकैद की सजा
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निधि, सन्मार्ग संवाददाता

टीटागढ़: खून के रिश्तों को शर्मसार करने वाले एक जघन्य हत्याकांड में बैरकपुर अदालत ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। अपनी ही सगी बहन की बेरहमी से हत्या करने और गहने लूटने के आरोपी भाई प्रदीप दास उर्फ डेनी को न्यायाधीश ने दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। बैरकपुर के तीसरे एडीजे कोर्ट ने यह फैसला सुनाया, जिससे मृतक परिवार को करीब 9 साल के लंबे इंतजार के बाद इंसाफ मिला है।

क्या थी वह काली दोपहर?

घटना 14 जुलाई 2017 की है। टीटागढ़ थाना अंतर्गत देबपुकुर हाल्टर बागान इलाके में दोपहर करीब 2:15 बजे सन्नाटा पसरा हुआ था। तभी आरोपी प्रदीप दास उर्फ डेनी ने अपनी बहन सैफाली धर पर अचानक हमला कर दिया। आरोप है कि उसने अपनी बहन को मौत के घाट उतारने के बाद घर में रखे सोने के गहने भी लूट लिए। इस नृशंस कांड के बाद इलाके में हड़कंप मच गया था। मृतक सैफली के पति मधुर धर ने उसी दिन टीटागढ़ थाने में अपनी पत्नी की हत्या और लूट का लिखित मामला दर्ज कराया था।

पुलिस की जांच और कानूनी प्रक्रिया

शिकायत मिलते ही टीटागढ़ पुलिस ने मामला संख्या 486 (दिनांक 14.07.2017) धारा 302/379 आईपीसी के तहत दर्ज किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन एसआई मधुसूदन मंडल को जांच का जिम्मा सौंपा गया। जांच अधिकारी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को धर दबोचा और साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने कड़ी मेहनत के बाद 4 दिसंबर 2017 को ही अदालत में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल कर दी थी।

अदालत में लंबी लड़ाई और कड़े साक्ष्य

इस मामले की सुनवाई 2 जनवरी 2018 को शुरू हुई। लोक अभियोजक (PP) शिशिर गुहा रॉय ने सरकार की ओर से दलीलें पेश कीं। 5 सितंबर 2018 से गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हुई। मामले को अंजाम तक पहुँचाने में टीटागढ़ थाने के कोर्ट कांस्टेबल पीयू प्रसाद सरकार और उनके सहायक सीवी सोमनाथ चक्रवर्ती व दिब्येंदु चौधरी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अदालती प्रक्रिया और गवाहों की निगरानी में सक्रियता दिखाई, जिससे केस मजबूत हुआ।

न्यायाधीश का ऐतिहासिक फैसला

विद्वान अपर जिला न्यायाधीश (तीसरा न्यायालय, बैरकपुर) ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पेश किए गए सबूतों के आधार पर माना कि आरोपी प्रदीप दास ने ही अपनी बहन की हत्या की थी। अदालत ने पाया कि यह अपराध न केवल जघन्य था, बल्कि रिश्तों की मर्यादा को तार-तार करने वाला था। 4 फरवरी 2026 को न्यायाधीश ने आरोपी को आजीवन कारावास (Life Imprisonment) की सजा सुनाई।

अदालत के इस फैसले का स्वागत करते हुए स्थानीय लोगों और पीड़िता के परिजनों ने राहत की सांस ली है। पीपी शिशिर गुहा रॉय ने कहा कि न्याय में समय जरूर लगा, लेकिन अंततः सत्य की जीत हुई।

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