ब्रात्य बसु ने कहा : धर्मेंद्र प्रधान के आरोप बेबुनियाद और मनगढ़ंत

राज्य के शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु
राज्य के शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु
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सबिता, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : राज्य के शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु ने शनिवार को कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के आरोप बेबुनियाद और मनगढ़ंत हैं। उन्होंने सोशल साइट पर कहा कि मैं उन्हें एक-एक करके जवाब दे रहा हूं। यह आरोप कि तृणमूल मिड-डे मील के फंड का इस्तेमाल पार्टी के काम के लिए कर रही है, यह पूरी तरह से बेबुनियाद है। अगर कहीं भी ऐसी कोई शिकायत मिलती है, तो कोई भी इस मामले में FIR दर्ज करा सकता है।

एक नजर में मुख्य बातें

मिड-डे मील फंड के दुरुपयोग के आरोप को बताया निराधार,

समग्र शिक्षा मिशन के फंड पर ‘शर्त’ लगाने का आरोप गलत

बिना शिक्षक वाले स्कूलों के आंकड़ों पर उठाए सवाल

स्कूलों में इंटरनेट सुविधा को लेकर केंद्र के दावे खारिज

AI और डेटा साइंस को पाठ्यक्रम में शामिल करने की तैयारी

जादवपुर को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का दर्जा न मिलने का आरोप बेबुनियाद

नेशनल एजुकेशन पॉलिसी पर ब्रात्य बसु ने यह कहा

बंगाल सरकार नेशनल एजुकेशन पॉलिसी लागू नहीं कर रही है, केंद्रीय इस आरोप पर ब्रात्य बसु ने कहा कि राज्य की एजुकेशन पॉलिसी 2023 में अपनायी गयी थी, जिसमें नेशनल एजुकेशन पॉलिसी की सभी स्वीकार्य बातों को शामिल किया गया है। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल के हितों की रक्षा करने वाली और राज्य में पहले से लागू पॉलिसी को भी शामिल किया गया है। राज्य की एजुकेशन पॉलिसी ज्यादा एडवांस्ड है। एजुकेशन समवर्ती सूची में होने के कारण, राज्य सरकार को अपनी पॉलिसी मानने का अधिकार है। वहीं ब्रात्य बसु ने यह भी कहा कि मातृभाषा में पढ़ाई के मामले में राज्य दूसरे राज्यों के मुकाबले ज्यादा एडवांस्ड सर्विस देता है। पश्चिम बंगाल में मातृभाषा में पढ़ाई पक्की करने के लिए न सिर्फ़ बंगाली बल्कि संथाली, राजवंशी, कामतापुरी, उर्दू, हिंदी, नेपाली और कई दूसरी मातृभाषाओं के लिए भी इंतजाम किए गए हैं।

समग्र शिक्षा मिशन के तहत 1,500 से 2,000 करोड़ देने की बात और इसके लिए नेशनल एजुकेशन पॉलिसी का पालन करना होगा, इस पर राज्य के शिक्षा मंत्री ने कहा कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी से जुड़ा मामला पहले ही सुलझा लिया गया है। यह ध्यान देने वाली बात है कि राज्य सरकार ने समग्र शिक्षा मिशन के तहत फंड के लिए जरूरी हर शर्त पूरी कर दी है। राज्य सरकार के सबसे ऊँचे लेवल से केंद्र सरकार को सभी मामलों की डिटेल में कई लेटर भेजे गए हैं और जवाब में ऐसी किसी भी गलत कंडीशनल मांग का कभी जिक्र नहीं किया गया। इसलिए, ऐसा फासीवादी रवैया निंदनीय है।

बंगाल में सबसे ज्यादा बिना टीचर वाले स्कूल की जानकारी में गड़बड़ियां हैं : ब्रात्य बसु

बंगाल में देश में सबसे ज्यादा बिना टीचर वाले स्कूल हैं : इस आरोप पर ब्रात्य बसु ने जवाब में कहा कि इस जानकारी में कई वजहों से गड़बड़ियां हैं। एजुकेशन पोर्टल में कई प्राइवेट एडेड स्कूल शामिल हैं जिनके टीचर जीरो हो गए और इसलिए उन्हें बंद कर दिया गया। हालाँकि, उनके UDISE नंबर की वजह से, वे अब भी पोर्टल पर सरकारी स्कूल के तौर पर दिखाए जा रहे हैं। इनकी पहचान कर ली गयी है और जल्द ही एक सही पोर्टल पब्लिश किया जाएगा।

बंगाल में सिर्फ़ 16% स्कूलों में इंटरनेट है, जबकि देश के 70% स्कूलों में इंटरनेट है, केंद्रीय इस आरोप पर ब्रात्य बसु ने कहा कि राज्य के सभी सरकारी अपर प्राइमरी, सेकेंडरी और हायर सेकेंडरी स्कूलों में बहुत पहले इंटरनेट की सुविधा दी गई थी। हाल ही में BSNL नेटवर्क के जरिए भी यही सुविधा दी जा रही है। अब तक ऐसे 66% स्कूलों को कवर किया जा चुका है। बाकी स्कूलों के भी इस महीने तक कवर होने की उम्मीद है। वहीं एआई के आरोप पर ब्रात्य बसु ने कहा कि इस मामले में सबसे पहले यह बताना चाहिए कि राज्य के स्कूलों में स्टूडेंट्स को कंप्यूटर एजुकेशन देने का इंतजाम पहले ही कर दिया गया है, जिसके बाद और एडवांस्ड टेक्निकल एजुकेशन दी जाएगी। डेटा साइंस और AI को शामिल किया जा रहा है और उन्हें करिकुलम में शामिल कर लिया गया है। इसलिए, बंगाल एडवांस्ड टेक्निकल एजुकेशन के बारे में काफी जागरूक है और सही रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।

जादवपुर को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का दर्जा देना चाहते थे। राज्य ने इससे वंचित रखा, केंद्रीय इस आरोप पर ब्रात्य बसु ने कहा कि राज्य सरकार को इस बारे में कोई कम्युनिकेशन नहीं मिला है, आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद है !

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