राज्य के 90% पुस्तकालयों से हटीं ममता की लिखी किताबें

ग्रंथालय मंत्री बोले, अनुपयोगी पुस्तकों की लाइब्रेरी में जरूरत नहीं
ममता बनर्जी
ममता बनर्जी
Published on

कोलकाता : राज्य के जनशिक्षा प्रसार एवं ग्रंथालय मंत्री गौरी शंकर घोष ने दावा किया है कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पूर्व जनशिक्षा प्रसार एवं ग्रंथालय मंत्री सिद्दीकुल्लाह चौधरी द्वारा लिखी गई पुस्तकों को राज्य के लगभग 90 प्रतिशत पुस्तकालयों से हटा दिया गया है। 'सन्मार्ग' से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि जिन पुस्तकों से नई पीढ़ी को सीखने या बौद्धिक विकास में मदद नहीं मिलती, उन्हें पुस्तकालयों में रखने की आवश्यकता नहीं है।

शुक्रवार को विकास भवन में मंत्री ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में सरकारी निर्देश के तहत स्कूलों और अन्य सार्वजनिक पुस्तकालयों में तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की लिखी पुस्तकें रखी गई थीं, जिसे लेकर उस समय भी विवाद हुआ था। उन्होंने कहा कि नई भाजपा सरकार ने निर्णय लिया है कि पुस्तकालयों में केवल उपयोगी, ज्ञानवर्धक और विद्यार्थियों के लिए लाभकारी साहित्य को ही स्थान दिया जाएगा।

घोष के अनुसार अब पुस्तकालयों में भारतीय इतिहास, संस्कृति, स्वामी विवेकानंद, रवींद्रनाथ ठाकुर, बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय, काजी नजरुल इस्लाम और श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन एवं विचारों पर आधारित पुस्तकों को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही राष्ट्रवादी विचार, विज्ञान तथा सामाजिक-आर्थिक विषयों से संबंधित साहित्य भी उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि छात्रों में अध्ययन की रुचि बढ़े और उनका बौद्धिक विकास हो सके।

मंत्री ने दावा किया कि पुस्तकालयों से "अनावश्यक पुस्तकों" को हटाने की प्रक्रिया लगभग 90 प्रतिशत पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य पुस्तकालयों को ऐसी पुस्तकों से समृद्ध करना है, जो समाज और विद्यार्थियों के लिए अधिक उपयोगी एवं प्रेरणादायी हों।

Google पर सन्मार्ग न्यूज़ पडे →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in