बीजेपी विधायक स्वप्न मजुमदार भी पहुंचे SIR की सुनवाई में

BJP MLA Swapan Majumdar also attended the SIR hearing.
फाइल फोटो REP
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निधि, सन्मार्ग संवाददाता

बनगांव: पश्चिम बंगाल में चल रही SIR (Special Identity Review) सुनवाई को लेकर राजनीतिक पारा गर्म है। ताज़ा मामला उत्तर 24 परगना जिले के बनगाँव दक्षिण से भाजपा विधायक स्वप्न मजुমदार का है। एक जनप्रतिनिधि होने के बावजूद उन्हें अपनी नागरिकता के साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए प्रशासन द्वारा सुनवाई में बुलाया गया, जिसके बाद जिले की राजनीति में हलचल मच गई है। शुक्रवार को भाजपा विधायक बनगाँव के एक मदरसे में आयोजित सुनवाई केंद्र पर पहुँचे और अधिकारियों के समक्ष आवश्यक दस्तावेज जमा किए।

क्यों मिला विधायक को नोटिस?

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2002 की मतदाता सूची में स्वप्न मजुমदार का नाम दर्ज नहीं था। इतना ही नहीं, उस वर्ष की सूची में उनके माता-पिता का नाम भी गायब था। इसी विसंगति के कारण उन्हें SIR सुनवाई के लिए बुलाया गया था।

सुनवाई केंद्र से बाहर निकलने के बाद विधायक ने मीडिया को बताया कि उन्होंने दस्तावेज के तौर पर अपना जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट और पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र जमा किया है। अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा, "मेरा जन्म इसी देश में हुआ है। 1999 में मैं 18 वर्ष का हुआ था, लेकिन काम के सिलसिले में मैं मुंबई चला गया था। 2012 में वापस लौटने के बाद मैंने मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाया। चूंकि मेरे पिता का निधन 1999 में हो गया था, इसलिए 2002 की सूची में उनका नाम नहीं था।"

भा​जपा विधायक बोले, "दूसरों को प्रोत्साहित करने के लिए आया हूँ"

विधायक मजुमदार ने दावा किया कि वे चाहते तो अपने ननिहाल के दस्तावेजों के जरिए 'मैपिंग' करवा सकते थे, लेकिन उन्होंने जानबूझकर ऐसा नहीं किया। उन्होंने कहा, "मैं खुद इस प्रक्रिया में शामिल होकर आम जनता और मतुआ शरणार्थियों को प्रोत्साहित करना चाहता हूँ कि वे डरे नहीं और कानूनी प्रक्रिया का पालन करें।"

तृणमूल का कटाक्ष: "अब पता चला कौन सी पार्टी में हैं?"

विधायक की इस स्थिति पर तृणमूल कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है। बनगाँव सांगठनिक जिला तृणमूल अध्यक्ष विश्वजीत दास ने कहा, "स्वप्न बाबू जिस पार्टी के विधायक हैं, वही पार्टी साजिश रचकर मतुआ शरणार्थियों के नाम मतदाता सूची से काट रही है। आज स्वप्न बाबू को समझ आ रहा होगा कि वह किस दल में हैं। जिस भाजपा ने NRC और नागरिकता के नाम पर लोगों को डराया, आज उनके अपने विधायक को नागरिकता साबित करनी पड़ रही है।"

विश्वजीत दास ने आगे कहा, "अगर मतदाता सूची से उनका नाम काटा जाता है, तो तृणमूल कांग्रेस उनके साथ खड़ी रहेगी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह बंगाल से किसी को भी बाहर नहीं जाने देंगी।"

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