

बेल्दा (पश्चिम बंगाल), 30 मार्च: ममता बनर्जी ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी पर समाज के विभिन्न वर्गों के बीच विभाजन पैदा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी इस माहौल का फायदा उठाकर देश को “लूटना” चाहती है।
पश्चिम मेदिनीपुर जिले में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पेश किए गए सियासी “आरोपपत्र” पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि पहला आरोपपत्र नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के खिलाफ होना चाहिए, जिन्होंने “दंगे भड़काकर सत्ता हासिल की।”
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा प्रशासन और पुलिस सेवाओं सहित हर क्षेत्र में हिंदू-मुस्लिम के बीच विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि कई सरकारी अधिकारियों का अपमान किया जा रहा है और चुनाव आयोग के दबाव में उनका “मनमाने ढंग से” तबादला किया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार सभी धर्मों का सम्मान करती है, जबकि भाजपा “पाखंडी” है। बनर्जी ने दावा किया कि जिस तरह से देश चलाया जा रहा है, उससे लगता है कि भाजपा को जल्द ही सत्ता छोड़नी पड़ सकती है।
मुख्यमंत्री ने नोटबंदी के दौरान लोगों की मौत का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार की आलोचना की। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में मुसलमानों, हिंदुओं और आदिवासियों के नाम हटाए गए।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि तृणमूल कांग्रेस ऐसे लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता देगी।
राज्य सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए बनर्जी ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में कई कल्याणकारी योजनाएं लागू की गईं और इनमें किसी भी धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया गया। उन्होंने केंद्र पर मनरेगा, आवास और सड़क योजनाओं के लिए फंड रोकने का भी आरोप लगाया और राज्य के “दो लाख करोड़ रुपये” बकाया जारी करने की मांग की।
रैली के दौरान उन्होंने भाजपा पर रोजगार के वादों को पूरा न करने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश में बेरोजगारी बढ़ी है, जबकि पश्चिम बंगाल में उनकी सरकार ने इसे कम किया है। अंत में उन्होंने लोगों से अपील की कि अगर चुनाव में टीएमसी हारती है, तो भाजपा “सब कुछ छीन लेगी।”