

निधि, सन्मार्ग संवाददाता
बिराटी: उत्तर 24 परगना जिले के बिराटी स्थित यदु बाबू बाजार में हाल ही में हुए भीषण अग्निकांड के बाद प्रभावित दुकानदारों और स्थानीय लोगों की सुध लेने के लिए पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल मौके पर पहुँचा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं ने जले हुए बाजार का बारीकी से निरीक्षण किया और पीड़ितों से बातचीत की। प्रतिनिधिमंडल में उत्तर 24 परगना जिला कांग्रेस (शहर) के अध्यक्ष तापस मजूमदार, कांग्रेस नेता पार्थ भौमिक, शक्ति मैत्र, आशुतोष चटर्जी, मधु साहा सहित संबंधित ब्लॉक कांग्रेस के अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित थे।
क्षतिग्रस्त इलाके का दौरा करने के बाद मीडिया से बात करते हुए शुभंकर सरकार ने बाजार के इतिहास को याद किया। उन्होंने कहा, "जब पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की सरकार थी, उस समय सुशील भट्टाचार्य और सुकुमार तालुकदार द्वारा दान की गई भूमि पर इस बाजार की स्थापना की गई थी। सेवा की भावना इतनी प्रबल थी कि उन परिवारों के किसी भी सदस्य ने बाजार में अपने लिए कोई जगह या दुकान नहीं ली।"
उन्होंने प्रशासन पर तीखा हमला करते हुए कहा कि इतने वर्षों के बाद भी स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन ने इस बाजार के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए।
शुभंकर सरकार ने इस बात पर चिंता जताई कि इस बाजार में पहले भी आग लगने की घटना हो चुकी है, फिर भी कोई सबक नहीं लिया गया। उन्होंने मांग की:
स्थाई बुनियादी ढांचा: बाजार में अब और अस्थाई ढांचों की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। प्रशासन को तुरंत यहाँ पक्का और स्थाई निर्माण शुरू करना चाहिए।
फायर सेफ्टी: नए ढांचे के साथ आधुनिक अग्निशमन यंत्रों (Fire Fighting System) की स्थापना अनिवार्य रूप से की जाए।
प्रशासनिक पहल: उन्होंने स्थानीय नगर पालिका प्रशासन, स्थानीय विधायक और सांसद से अपील की कि वे राजनीति से ऊपर उठकर दुकानदारों के पुनर्वास और बाजार की सुरक्षा के लिए सामूहिक पहल करें।
राज्य की कानून-व्यवस्था और सरकारी तंत्र पर सवाल उठाते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पश्चिम बंगाल में आपदा प्रबंधन विभाग (Disaster Management Department) का अस्तित्व केवल कागजों तक सीमित रह गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य भर में आपदाओं से निपटने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे का अभाव है, जिसके कारण आए दिन आम जनता को अपनी जान-माल का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
अंत में, उन्होंने मांग की कि सरकार केवल आश्वासन देने के बजाय प्रभावित व्यापारियों को तुरंत वित्तीय सहायता प्रदान करे ताकि वे फिर से अपने पैरों पर खड़े हो सकें।