बाइक टैक्सी चालकों ने अपनी मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन

एग्रीगेटर कंपनियों की मनमानी के खिलाफ हुंकार
Bike taxi drivers submitted a memorandum outlining their demands.
अपनी मांगों को लेकर रैली निकालते बाइक टैक्सी चालक
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सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता: महानगर में अपनी सेवाओं के जरिए यातायात को सुलभ बनाने वाले बाइक टैक्सी चालकों ने अब अपने अधिकारों के लिए संघर्ष शुरू कर दिया है। AIUTUC से संबद्ध 'कोलकाता सबअर्बन बाइक टैक्सी ऑपरेटर्स यूनियन' के आह्वान पर गुरुवार को सैकड़ों बाइक टैक्सी चालकों ने कोलकाता की सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। गणेश चंद्र एवेन्यू पर बड़ी संख्या में एकत्रित होने के बाद चालकों ने एक विशाल रैली निकाली, जो परिवहन विभाग (परिवहन भवन) तक पहुँची।

प्रमुख मांगें: श्रमिक का दर्जा और सामाजिक सुरक्षा

यूनियन ने राज्य सरकार के समक्ष अपनी 10 सूत्री मांगें रखी हैं। चालकों की सबसे प्रमुख मांग उन्हें 'परिवहन श्रमिक' के रूप में मान्यता देना है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे दिन-रात सड़कों पर काम करते हैं, लेकिन उन्हें सरकारी स्तर पर श्रमिक नहीं माना जाता, जिसके कारण वे किसी भी सरकारी लाभ या बीमा योजना से वंचित रह जाते हैं। इसके अलावा, उन्हें मुख्यमंत्री की 'सामाजिक सुरक्षा योजना' के दायरे में लाने की मांग भी पुरजोर तरीके से उठाई गई।

कंपनियों की मनमानी और 'दास प्रथा' का आरोप

विरोध सभा को संबोधित करते हुए यूनियन के अध्यक्ष शांति घोष ने सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों (एग्रीगेटर) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनियां बिना किसी पूर्व सूचना या ठोस कारण के चालकों की आईडी ब्लॉक कर रही हैं। उन्होंने इसे 'आधुनिक दास प्रथा' करार देते हुए कहा कि चालकों को अपना पक्ष रखने का मौका तक नहीं दिया जाता। साथ ही, कंपनियों द्वारा गैर-पंजीकृत (नॉन-कमर्शियल) बाइकों का उपयोग करने पर भी चिंता जताई गई, जिससे न केवल वैध चालकों का रोजगार छिन रहा है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में है।

निदेशक का आश्वासन और भविष्य की रणनीति

परिवहन मंत्री की अनुपस्थिति में यूनियन के सचिव देबू साव के नेतृत्व में पाँच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने परिवहन निदेशक अरिंदम मुखर्जी से मुलाकात की और उन्हें अपना ज्ञापन सौंपा। निदेशक ने चालकों की मांगों को ध्यान से सुना और उनकी तार्किकता को स्वीकार किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि परिवहन विभाग इन मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगा और जल्द ही आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

हालांकि, शांति घोष और अन्य नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि सरकार और कंपनियां जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान नहीं करती हैं, तो वे पूरे राज्य में एक बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे। इस प्रदर्शन के कारण कुछ समय के लिए मध्य कोलकाता में यातायात प्रभावित रहा, लेकिन पुलिस की तत्परता से स्थिति नियंत्रण में रही।

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