

CEO कार्यालय ने कहा, हो रही जांच
केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : भवानीपुर में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बैठक के ठीक अगले दिन शनिवार को वोटर लिस्ट की स्पेशल इंटेंसिफाइड रिवीजन (SIR) सुनवाई के दौरान तनाव की स्थिति बन गई। वोटर्स ने आरोप लगाया कि जरूरी दस्तावेज जमा कराने के बावजूद उन्हें रसीद या रिसीव्ड कॉपी नहीं दी जा रही, जिससे भविष्य में नाम को लेकर परेशानी का डर पैदा हो गया है। इस संबंध में राज्य के सीईओ कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि इस संबंध में जांच की जा रही है। अभी तक कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला है।
मुख्यमंत्री की बैठक के बाद बढ़ी सख्ती
शुक्रवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने विधानसभा क्षेत्र भवानीपुर के BLA और स्थानीय नेताओं के साथ बैठक की थी। इस बैठक में उन्होंने निर्देश दिया कि SIR स्क्रूटनी की रोज़ाना रिपोर्ट कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम को सौंपी जाए, जो आगे मुख्यमंत्री को रिपोर्ट करेंगे। इस निर्देश के बाद प्रशासनिक स्तर पर गतिविधियां तेज़ हुईं।
सुनवाई केंद्र पर वोटर्स का आक्रोश
शनिवार को SIR सुनवाई केंद्र पर मौजूद वोटर्स के एक समूह ने शिकायत की कि नाम सुधारने या दोबारा जोड़ने के लिए उन्होंने सभी जरूरी दस्तावेज जमा कर दिए हैं, लेकिन बदले में कोई रसीद नहीं दी जा रही। वोटर्स का कहना है कि अगर आगे चलकर कोई विवाद होता है, तो वे सबूत कैसे पेश करेंगे।
45 हजार नाम हटने से बढ़ी चिंता
SIR प्रक्रिया के पहले चरण में भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र के करीब 45,000 वोटरों के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए, जिनमें से अधिकांश को ‘मृत’ बताया गया था। इससे पहले भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आशंका जताई थी कि असली वोटरों के नाम हटाए जा सकते हैं और SIR के अंतिम चरण में यह चिंता फिर से राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है।