भागवत 75 वर्ष के हुए, प्रधानमंत्री सहित भाजपा नेताओं ने उनके नेतृत्व को सराहा

भागवत 2009 से सरसंघचालक के रूप में काम कर रहे हैं
Bhagwat turns 75
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत
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नयी दिल्ली : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत गुरुवार को 75 साल के हो गए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सत्तारूढ़ गठबंधन के कई नेताओं ने आरएसएस के उनके नेतृत्व की सराहना की। भागवत 2009 से सरसंघचालक के रूप में संगठन के विस्तार और अल्पसंख्यकों सहित समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उन्हें एक मिलनसार, स्पष्टवादी आवाज के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने सत्तारूढ़ भाजपा के साथ सुचारू संबंध सुनिश्चित किए हैं। उन्होंने यह सुनिश्चित किया है कि 1998 से 2004 के बीच अटल बिहारी वाजपेयी नीत गठबंधन सरकार के दौरान दोनों संगठनों के बीच संबंधों में जो सार्वजनिक कटुता आई थी, वह 2014 में मोदी के सत्ता में आने के बाद से नहीं दिखे। शिक्षा से लेकर श्रम तक, विभिन्न क्षेत्रों में आरएसएस के 32 सहयोगी संगठन हैं। लंबे समय से आरएसएस को एक ऐसा संगठन माना जाता था जो सार्वजनिक संवाद से बचता है। आलोचक संगठन पर ‘गोपनीयता’ बरतने का आरोप लगाते थे और भागवत को इसे खोलने का श्रेय दिया जाता है।

भागवत से कुछ दक्षिणपंथी नाराज : वह अक्सर समाज के विभिन्न वर्गों के साथ बातचीत करते रहे हैं, जिनमें अल्पसंख्यक भी शामिल हैं, जो लंबे समय से आरएसएस के हिंदुत्व एजेंडे को संदेह की नजर से देखते रहे हैं। हाल में भागवत ने एक प्रश्नोत्तर सत्र सहित तीन दिवसीय संवाद का आयोजन किया था। ‘हर मस्जिद के नीचे शिवलिंग नहीं ढूँढ़ना चाहिए’ या ‘हर भारतीय का ‘डीएनए’ एक जैसा है’, जैसी उनकी कुछ टिप्पणियों ने कई बार दक्षिणपंथ के एक वर्ग को नाराज किया है, लेकिन वह हिंदुत्व के विश्व दृष्टिकोण को बढ़ावा देने में आगे रहे हैं जो देश की अंतर्निहित आस्थाओं और विचारधाराओं की विविधता को स्वीकार करता है।

केएस सुदर्शन की जगह बने थे सरसंघचालक : एक आरएसएस पदाधिकारी के पुत्र भागवत ने संगठन में विभिन्न पदों पर और देश के विभिन्न हिस्सों में काम किया। वह बीमार केएस सुदर्शन की जगह सरसंघचालक बने थे। प्रधानमंत्री मोदी, उनके मंत्रिमंडल के वरिष्ठ सदस्यों- राजनाथ सिंह, अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा ने भागवत को शुभकामनाएं दीं और संगठन के उनके नेतृत्व की प्रशंसा की, जो भाजपा के लिए वैचारिक प्रेरणा रहा है।

मोदी ने क्या कहा : प्रधानमंत्री मोदी ने मोहन भागवत की ‘‘बौद्धिक गहराई और सहृदय नेतृत्व’’ की प्रशंसा करते हुए कहा कि 2009 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख के रूप में उनका कार्यकाल इस संगठन की 100 साल की यात्रा में सर्वाधिक परिवर्तन का कालखंड माना जाएगा। भागवत के 75वें जन्मदिन पर बृहस्पतिवार को कई अखबारों में प्रकाशित लेख में मोदी ने कहा कि संघ प्रमुख ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का जीवंत उदाहरण हैं और उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज को संगठित करने, समता-समरसता और बंधुत्व की भावना को सशक्त करने में समर्पित किया है। उन्होंने कहा कि यह सुखद संयोग है कि इस साल विजय दशमी पर आरएसएस 100 वर्ष का हो जाएगा और इसके साथ ही महात्मा गांधी की जयंती, लालबहादुर शास्त्री की जयंती भी उसी दिन आ रही है। उन्होंने कहा कि इस संगठन के पास भागवत जैसे दूरदर्शी और परिश्रमी सरसंघचालक हैं।

अमित शाह और राजनाथ सिंह, जे पी नड्डा समेत तमाम नेताओं ने की प्रशंसा : गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भागवत ने आरएसएस के जरिए समाज सेवा और युवाओं के चरित्र निर्माण में अविस्मरणीय काम किया है। गृह मंत्री ने कहा कि उन्होंने आपातकाल के दौरान संगठन को लोकतंत्र की ढाल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्र निर्माण और मानव निर्माण के प्रति भागवत की प्रतिबद्धता की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत के सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में उनका अमूल्य योगदान अनगिनत आरएसएस कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा है। भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा ने कहा कि भागवत के मार्गदर्शन में संघ ने सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण के मंत्र के साथ-साथ सद्भाव और एकता का संदेश भी लोगों तक पहुंचाया है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी भागवत को शुभकामनाएं दीं।

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