‘दिमागी नक्सलियों’से सचेत रहें : मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा : हथियारबंद माओवादियों के खात्मे के बावजूद देश में नक्सलियों से खतरा बरकरार
Kolkata
दिमागी नक्सलियों’ ने राजनीतिक दलों समेत कई संगठनों में पैठ बना ली है: पीएम
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जगदलपुर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि हथियारबंद माओवादियों के खात्मे के बावजूद नक्सलवाद का खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘दिमागी नक्सलियों’ ने राजनीतिक दलों समेत कई संगठनों में पैठ बना ली है और वे लोगों को संविधान तथा लोकतंत्र के खिलाफ भड़का रहे हैं।

नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमें ऐसे तत्वों की पहचान करके उन्हें हराना होगा और देश को सुरक्षित करना होगा। छत्तीसगढ़ में बस्तर जिले के करनपुर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के शिविर में जवानों के साथ दिवाली मनाते हुए मोदी ने कहा कि माओवादी आतंक का खात्मा देश की सही नीतियों और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति की जीत है।

उन्होंने कहा, ‘सफलताओं के बीच हमें और बात याद रखनी है कि ये आज भी देश के संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ लोगों को उकसा रहे हैं। हमें इन्हें परास्त करना है और देश को सुरक्षित करना है।’

नक्सली फंडिंग पर रोक लगाई

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने ऐसे फैसले लिए हैं, जिनसे नक्सलियों और अलगाववादियों के ‘फंडिंग’ नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। उन्होंने कहा, ‘पहले की सरकारों ने जमीन पर लड़ाई में सुरक्षाबलों के हाथ बांध रखे थे।

नक्सली हमले हो जाते थे लेकिन सुरक्षाबलों के पास खुलकर पलटवार करने की आजादी नहीं थी, हमने सुरक्षाबलों को हर जरूरी निर्णय लेने की आजादी दी। पहले सरकार और व्यवस्था में बैठे कुछ लोगों से वामपंथी उग्रवाद को जो समर्थन मिलता था, हमने उसे रोकने का भी काम किया।’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘सफलता के लिए सही नीयत और सही नीतियां आवश्यक है। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हमने एक के बाद एक कड़े निर्णय लिए, कई ऐसे कदम भी उठाए गए जो आज तक लोगों की जानकारी में नहीं है।

इन निर्णयों और प्रयासों से नक्सलवादियों और अलगाववादियों की ‘फंडिंग’ पर बहुत बड़ी चोट की गई। नकली मुद्रा नेटवर्क को तबाह किया गया। इससे उनकी आर्थिक कमर ही नहीं टूटी बल्कि पूरी आपूर्ति लाइन ही अवरुद्ध हो गई है, इससे हथियारों की आपूर्ति बंद हुई।’

आतंकवाद की कमर तोड़ी

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हम एक बहुत बड़े लक्ष्य को लेकर चल रहे थे। हमारा लक्ष्य था किसी मां की गोद सूनी न हो, कोई परिवार तबाही का सामना न करे, कोई बच्चा हथियार उठाकर हिंसा की राह पर न निकले, किसी युवा का भविष्य बर्बाद न हो, इसलिए जब तक यह लक्ष्य पूरा नहीं हो गया, हम संकल्प के साथ लगातार लगे रहे।’

मोदी ने कहा, ‘कोई प्रचार-प्रसार नहीं, कोई दिखावा नहीं, हमने संवेदनशीलता के साथ काम करते हुए माओवादी आतंक की कमर तोड़ दी। हमने सेवा भाव से नक्सल प्रभावित इलाकों में लोगों के जीवन को बदला, इसलिए नक्सलवाद से पीड़ित लोग भी सरकार और सुरक्षाबलों के साथ मजबूती से खड़े हुए हैं।’ उन्होंने माओवादी आतंक के खिलाफ लड़ाई को आसान न बताते हुए याद दिलाया कि एक समय ऐसा था जब लगभग 20 राज्यों के 230 से अधिक जिले नक्सलवाद से प्रभावित थे।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘आप 2004 से 2013 तक के आंकड़े देखेंगे कि हर साल जितने नक्सली मारे जाते थे, उससे ज्यादा संख्या में हमारे वीर जवान शहीद होते थे। नक्सली संगठनों के मुखिया इसे अपनी जीत समझते थे, जश्न मनाते थे।

दुर्भाग्य से तब की सरकारों द्वारा नक्सलवाद को लाइलाज बीमारी समझकर छोड़ दिया गया था। मेरे आदिवासी परिवारों को उनके नसीब पर जीने के लिए छोड़ दिया गया था। स्वीकार कर लिया गया था कि यह तो बस ऐसे ही चलता रहेगा, गोलियां चलेंगी, जवान मरेंगे, नागरिक पिटेंगे।’

2014 तक इच्छाशक्ति की कमी थी

नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘कोई भी देश अपने दुश्मनों के लिए ‘ऐसे ही चलता रहेगा’ की सोच से नहीं चलता। देश को आगे बढ़ाने के लिए देश के दुश्मनों को, बुलंद हौसलों के साथ एक रणनीति बनाकर कुचलना ही होता है। इसके लिए राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी देश में थी, वह कमी साल 2014 में दूर हुई।

आपने इस प्रधान सेवक को मां भारती की सेवा का मौका दिया।’ मोदी ने कहा, ‘हमने देखा है 2014 के बाद हालत भी बदलने लगे और आंकड़े भी बदलने लगे। हमारे यहां नक्सलियों से ज्यादा संख्या में जवानों के मारे जाने की चर्चा रही, लेकिन 47 साल बाद पहली बार ऐसा हुआ, जब पिछले एक वर्ष में CRPF का एक भी जवान को ड्यूटी के दौरान जान नहीं गंवानी पड़ी।’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘जब नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई शुरू की गई तब साथ ही नक्सल प्रभावित इलाकों के विकास के लिए विशेष अभियान भी चलाए गए। वामपंथी उग्रवाद से पीड़ित इलाकों में सड़कें बनाई गईं। सुरक्षा के पूरे प्रबंध किए गए।

मोबाइल टावर लगाए गए।’ उन्होंने कहा, ‘आदिवासी बच्चों की शिक्षा के लिए एकलव्य स्कूल खोले गए, ITI खोले गए। हजारों सुदूर गांव में पहली बार पानी-बिजली सड़क जैसी सुविधाएं पहुंचीं। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को मौका दिया गया और उनके पुनर्वास के लिए योजनाएं बनाई गईं।’

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