

जनवरी 2027 में छात्रों तक पहुंचेंगी नई पाठ्यपुस्तकें
मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में स्कूली शिक्षा प्रणाली के पाठ्यक्रम में बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। राज्य की नई 'सिलेबस-कम-करिकुलम कमेटी' ने पाठ्यपुस्तकों की सामग्री में संशोधन की रूपरेखा तैयार कर ली है, जिसके तहत कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और साहित्यिक अध्यायों को बदला जा रहा है। साहित्यिक पाठों में बदलाव करते हुए छात्रों को रवींद्रनाथ टैगोर की प्रसिद्ध कविता 'अफ्रीका' के स्थान पर 'शिवाजी उत्सव' और शचींद्रनाथ सेनगुप्ता के नाटक 'सिराज-उद-दौला' की जगह खिरोदप्रसाद विद्याविनोद के नाटक 'बंगर प्रतापादित्य' को शामिल करने का प्रस्ताव है। इस परिवर्तन का उद्देश्य छात्रों को भारतीय संस्कृति और इतिहास के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं से परिचित कराना है।
पाठ्यक्रम से हटेगा सिंगुर आंदोलन
पश्चिम बंगाल सरकार स्कूली पाठ्यक्रम में बड़े बदलाव करने जा रही है, जिसके तहत कक्षा 8 की इतिहास की पाठ्यपुस्तक से सिंगुर आंदोलन को हटाया जाएगा। इसके स्थान पर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया जाएगा, ताकि छात्र राष्ट्रीय स्तर पर मुकाबला कर सकें। गणित और विज्ञान में 5 से 10% बदलाव होंगे, जबकि भाषा और इतिहास में बड़े संशोधन किए जाएंगे। इतिहास में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन और योगदान को विशेष स्थान मिलेगा। इसमें कलकत्ता विश्वविद्यालय में रवींद्रनाथ टैगोर के बंगाली दीक्षांत भाषण, तारकेश्वर की बैठक और उनकी कश्मीर यात्रा के विवरण को जोड़ा जाएगा। समिति यह सुनिश्चित कर रही है कि इन नए अध्यायों के लिए पूरी तरह प्रामाणिक दस्तावेज उपलब्ध हों।
नवंबर तक छपेंगी नई किताबें
शिक्षा विभाग के अनुसार इन सभी संशोधनों को अंतिम रूप देकर नवंबर तक छपाई के लिए भेज दिया जाएगा ताकि जनवरी माह में नई पुस्तकें छात्रों तक पहुंचाई जा सकें। सरकार का यह कदम राज्य के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों के शैक्षिक स्तर को ऊंचा उठाने और छात्रों को एक नई ऐतिहासिक दृष्टि प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।