परिवार से बिछड़ी झारखंड की आदिवासी महिला की होगी घर वापसी

एक महीने की थी गर्भवती, अथक प्रयासों से शिशु और मां मिलेंगे अपनों से
Mental Ailment Tribal Woman Rescued, Returning Home with Child
परिवार से बिछड़ी महिला जिसकी होगी झारखंड में घर वापसी
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निधि, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : पश्चिम बंगाल से मानवता को गौरवान्वित करने वाली एक बेहद भावुक और सराहनीय घटना सामने आई है। यहां एक मानसिक रूप से अस्वस्थ और गर्भवती आदिवासी महिला को न केवल सुरक्षित रेस्क्यू किया गया, बल्कि अब उसे उसके स्वस्थ नवजात बच्चे के साथ वापस उसके घर भेजने की तैयारी पूरी कर ली गई है।

अदालत और होम प्रशासन की देखरेख में हुआ शिशु का जन्म

घटना की शुरुआत 14 महीने पहले हुई थी, जब पश्चिम मिदनापुर जिले की कोतवाली थाना पुलिस ने इस असहाय महिला को रेस्क्यू किया था। अदालत के निर्देश पर उसे पहले मिदनापुर सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल के 'वन स्टॉप सेंटर' में उसकी काउंसलिंग कर घर भेजने का प्रयास किया गया, लेकिन मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण वह अपना पता नहीं बता सकी। इसके बाद कोर्ट के आदेश पर उसे 'प्रबुद्ध भारती शिशुतीर्थ होम' में स्थानांतरित कर दिया गया। महिला उस समय एक महीने की गर्भवती थी, जिसके चलते अदालत ने अस्पताल प्रशासन और पुलिस को उसकी विशेष देखभाल के निर्देश दिए थे। होम में रहते हुए महिला ने एक स्वस्थ पुत्र को जन्म दिया, जो अब चार महीने का हो चुका है।

हैम रेडियो की तत्परता से मिला झारखंड के घने जंगलों में छिपा आशियाना

समय बीतने के साथ अपने घर लौटने की व्याकुलता में महिला अक्सर रोती रहती थी। मानसिक अवसाद और अपनों से दूर होने के कारण उसने अपने मासूम बच्चे को दूध पिलाना तक बंद कर दिया था। महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए होम अधिकारियों ने 'वेस्ट बंगाल रेडियो क्लब' (हैम रेडियो) से संपर्क किया। क्लब के सदस्यों की कड़ी मेहनत के बाद आखिरकार महिला की पहचान सोरा बारला के रूप में हुई, जो झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले के गोएलकेरा के एक बेहद सुदूर और घने जंगलों से घिरे क्षेत्र की रहने वाली है। उसके भाई मंगल सिंह जमुदा को जब बहन और भांजे के सुरक्षित होने की खबर मिली, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। भाई अपनी बहन और उसके बच्चे को वापस लेने बंगाल आ रहा है। हैम रेडियो के संपादक अंबरीश नाग विश्वास ने कहा कि एक मां को उसके बच्चे के साथ सुरक्षित घर लौटाना बंगाल के लिए सबसे बड़ा उपहार और गर्व की बात है।

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