निजी परिवहन व्यवस्था को सुधारने की कवायद पर सीएम कायार्लय में ज्ञापन सौंपेंगे बस मालिक

Bengal Private Bus Crisis: Fuel Price Hike Spurred Owners to Submit Memo to CM Next Week
फाइल फोटो
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निधि, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में चरमरा चुकी निजी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए पूरे सिस्टम में बड़े बदलाव की मांग उठने लगी है। इस मुद्दे पर निजी बस मालिकों के संगठन 'ऑल बंगाल बस-मिनीबस सब्ग्समन्वय समिति' के सदस्यों ने एक अहम बैठक की। बैठक के ही दिन डीजल की कीमत में 3.11 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई, जिससे दाम 95.13 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गए। बस मालिकों का कहना है कि अब सिर्फ किराया बढ़ाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि राज्य सरकार के सीधे हस्तक्षेप और पूरे सिस्टम में आमूल-चूल बदलाव के बिना इस व्यवसाय का अस्तित्व बचाना नामुमकिन है।

पिछले छह वर्षों में 18रुपये से अधिक महंगा हुआ डीजल, दर्जनों रूट बंद

साल 2020 के अगस्त में कोलकाता में एक लीटर डीजल की कीमत 77.06 रुपये थी, जो पिछले छह वर्षों में 18 रुपये से अधिक बढ़ चुकी है। इससे बसों का दैनिक ईंधन खर्च लगभग एक हजार रुपये तक बढ़ गया है। बस मालिकों का आरोप है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद सरकारी तौर पर किराया नहीं बढ़ाया गया। भारी नुकसान के कारण अकेले कोलकाता में कम से कम 40 रूटों पर बसों की संख्या आधी से भी कम हो गई है और दर्जनों रूट पूरी तरह बंद हो चुके हैं। कई लोग तो इस घाटे के सौदे वाले व्यवसाय को ही छोड़ चुके हैं।

अनियोजित ऑटो-टोटो और सड़कों पर अतिक्रमण से बढ़ा संकट

समिति के महासचिव राहुल चटर्जी ने कहा कि वे मुख्यमंत्री कार्यालय में ज्ञापन सौंपकर निजी परिवहन की वास्तविक स्थिति से अवगत कराएंगे। इस ज्ञापन में बताया जाएगा कि कैसे विभिन्न रूटों पर अनियोजित तरीके से चल रहे ऑटो-रिक्शा और टोटो बसों के राजस्व को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसके अलावा, संगठन पड़ोसी राज्य ओडिशा की तर्ज पर हाईवे के लिए 1000 रुपये का मासिक पास जारी करने और राज्य व राष्ट्रीय राजमार्गों को अतिक्रमण मुक्त करने की मांग भी मुख्यमंत्री के सामने रखेगा ताकि परिवहन व्यवसायियों का मनोबल वापस लौट सके।

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