

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पश्चिम बंगाल ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 12,905 करोड़ रुपये का वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह किया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 11,532 करोड़ रुपये की तुलना में 12 प्रतिशत अधिक है। इस दौरान राज्य के राजस्व में 1,373 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वृद्धि दर्ज की गई। अधिकारियों ने इस वृद्धि का प्रमुख कारण कर अनुपालन (कम्प्लायंस) में सुधार और फर्जी लेन-देन पर की गई सख्त कार्रवाई को बताया है।
सूत्रों के मुताबिक राजस्व में यह बढ़ोतरी बेहतर कर अनुपालन का परिणाम है। उन्होंने "अब तक का रुझान बेहद सकारात्मक है और हमें उम्मीद है कि यह आगे भी जारी रहेगा तथा और बेहतर होगा।" सूत्रों के अनुसार, 12 प्रतिशत की वृद्धि वास्तविक सुधार को पूरी तरह नहीं दर्शाती। सितंबर 2025 में अधिकांश वस्तुओं पर जीएसटी दरों को 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया था। सफेद उपभोक्ता वस्तुओं (व्हाइट गुड्स), एफएमसीजी उत्पादों और छोटी कारों पर कर दरों में कटौती के कारण इस वर्ष कर संग्रह कम दरों पर हुआ। एक अधिकारी ने बताया, "यदि पिछले वित्त वर्ष की कर दरें लागू रहतीं, तो राजस्व वृद्धि 20 प्रतिशत से अधिक होती।"
इस तिमाही की एक प्रमुख विशेषता अंतरराज्यीय जीएसटी (IGST) संग्रह का प्रदर्शन रहा। अन्य राज्यों में उपभोग होने वाले सामान और सेवाओं पर लगने वाले आउटबाउंड आईजीएसटी में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 17 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। हालांकि, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में आउटबाउंड आईजीएसटी में 0.2 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज हुई, जबकि इनबाउंड आईजीएसटी में 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
अधिकारियों ने बताया कि आउटबाउंड आईजीएसटी में यह गिरावट फर्जी आईजीएसटी लेन-देन की पहचान कर उन्हें समाप्त करने के कारण संभव हुई। राज्य जीएसटी आयुक्त खालिद अनवर ने कहा कि उपभोक्ता प्रधान राज्य होने के बावजूद पहले आउटबाउंड आईजीएसटी में 17 प्रतिशत की वृद्धि "आश्चर्यजनक" थी। एक कर विशेषज्ञ के अनुसार, "आउटबाउंड आईजीएसटी में 0.2 प्रतिशत की गिरावट का वास्तविक अर्थ यह है कि फर्जी लेन-देन पर अंकुश लगाकर राज्य ने प्रभावी रूप से 17 प्रतिशत से अधिक का वास्तविक लाभ अर्जित किया है।"