बांग्लादेश चुनाव 2026: शेख हसीना के बाद जमात-बीएनपी की टक्कर, भारत की रणनीति पर नजर

बांग्लादेश में आम चुनाव के साथ-साथ “जुलाई जनमत-संग्रह” भी आयोजित किया जा रहा है। देश की जनता इन दोनों प्रक्रियाओं में मतदान कर रही है।
बांग्लादेश चुनाव 2026: शेख हसीना के बाद जमात-बीएनपी की टक्कर, भारत की रणनीति पर नजर
Published on

ढाका/नई दिल्ली से विशेष रिपोर्ट

बांग्लादेश की राजनीति में पिछले वर्ष अगस्त में बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी। 5 अगस्त 2025 को उन्होंने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दिया और भारत में राजनीतिक शरण लेते हुए दिल्ली पहुंचीं। तब से वे भारत में ही रह रही हैं। इस घटनाक्रम के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में कूटनीतिक स्तर पर गिरावट देखी गई।

बांग्लादेश का गठन 1971 के मुक्ति संग्राम के बाद हुआ था, जब भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में निर्णायक भूमिका निभाई थी। ऐसे में वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को उसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। सवाल उठ रहा है कि क्या बांग्लादेश की इस्लामी कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी देश को 1971 से पहले की स्थिति की ओर ले जाना चाहती है?

इसी बीच बांग्लादेश में आम चुनाव के साथ-साथ “जुलाई जनमत-संग्रह” भी आयोजित किया जा रहा है। देश की जनता इन दोनों प्रक्रियाओं में मतदान कर रही है।

भारत की कूटनीतिक चिंता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकता है कि भारत-बांग्लादेश के द्विपक्षीय संबंध स्थिर और सकारात्मक बने रहें। भौगोलिक रूप से छोटा होने के बावजूद बांग्लादेश की सामरिक स्थिति भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान बांग्लादेश में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। हाल के महीनों में पाकिस्तानी सेना और आईएसआई के प्रतिनिधियों की ढाका यात्राओं तथा कराची-ढाका उड़ानों की बहाली को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।

वर्तमान में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का नेतृत्व यूनुस कर रहे हैं। राजनीतिक परिदृश्य में मुख्य मुकाबला बीएनपी (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) और जमात के बीच है। पहली बार जमात स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ रही है। पहले वह बीएनपी के साथ गठबंधन में थी, लेकिन अब दोनों दलों के बीच मतभेद स्पष्ट हैं।

अवामी लीग चुनाव से बाहर

शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग को इस बार चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी गई है। पार्टी नेतृत्व को निर्देश दिया गया है कि कोई भी नेता स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में भी चुनाव न लड़े। हसीना के पुत्र सजीब वाजेद जॉय ने भी स्पष्ट किया है कि अवामी लीग के वोटरों को जमात को हराने के लिए रणनीतिक रूप से मतदान करना चाहिए।

विश्लेषकों का मानना है कि बीएनपी 1971 के मुक्ति संग्राम को स्वीकार करती है और व्यापार समर्थक नीति रखती है, इसलिए अवामी लीग के वोटरों का झुकाव उसकी ओर हो सकता है। वहीं आशंका जताई जा रही है कि यदि जमात सत्ता में आती है तो हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों में वृद्धि हो सकती है और पाकिस्तान का प्रभाव बढ़ सकता है, जो भारत के लिए चुनौतीपूर्ण होगा।

हालांकि जमात नेतृत्व अपने अभियान में यह कह रहा है कि बीएनपी और अवामी लीग दोनों को जनता ने आजमा लिया है। जमात खुद को विचारधारा आधारित और भ्रष्टाचार मुक्त विकल्प के रूप में प्रस्तुत कर रही है। युवाओं को आकर्षित करने के लिए उसने अपने छात्र संगठन को सक्रिय किया है।

मोदी सरकार की रणनीति

नई दिल्ली इस पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखे हुए है। प्रधानमंत्री कार्यालय, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल स्थिति का प्रबंधन कर रहे हैं। भारत की रणनीति के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं—

  1. भारत चुनाव में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप नहीं करेगा।

  2. जो भी सरकार बने, भारत उसके साथ द्विपक्षीय संबंध बनाए रखेगा।

  3. सांस्कृतिक और आर्थिक सहयोग जारी रहेगा, चाहे सत्ता किसी भी दल के हाथ में हो।

भारत की कूटनीति का उदाहरण देते हुए यह भी उल्लेख किया जा रहा है कि नई दिल्ली ने अफगानिस्तान में तालिबान से भी संवाद बनाए रखा है, जो उसकी व्यवहारिक विदेश नीति को दर्शाता है।

संभावित चार परिदृश्य

भारत चार संभावित स्थितियों पर नजर रखे हुए है—

  1. बीएनपी को पूर्ण बहुमत मिले और तारिक रहमान प्रधानमंत्री बनें।

  2. जमात को बहुमत मिले और वह सरकार बनाए।

  3. किसी दल को बहुमत न मिले, तो बीएनपी-जमात या अन्य छात्र संगठनों के साथ गठबंधन सरकार बने।

  4. राष्ट्रीय सरकार का गठन, जिसमें यूनुस नेतृत्व करें और विभिन्न दल मिलकर अस्थायी स्थिरता सुनिश्चित करें, जिसके बाद नए चुनाव कराए जाएं।

नई दिल्ली फिलहाल सभी विकल्प खुले रखते हुए सावधानीपूर्वक कदम बढ़ा रही है। चुनाव परिणामों के आधार पर भारत अपनी रणनीतिक और कूटनीतिक नीति में आवश्यक समायोजन करेगा।

logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in