बंबूफ्लैट–चाथम कनेक्टिविटी संकट पर उठी आवाज, 12 नवंबर को शांतिपूर्ण धरना

बंबूफ्लैट क्षेत्र में आम जनता, सामाजिक कार्यकर्ता और समुदाय प्रतिनिधियों द्वारा 12 नवम्बर को बंबूफ्लैट जेट्टी पर शांतिपूर्ण धरना देने की घोषणा करते हुए जनप्रतिनिधि
बंबूफ्लैट क्षेत्र में आम जनता, सामाजिक कार्यकर्ता और समुदाय प्रतिनिधियों द्वारा 12 नवम्बर को बंबूफ्लैट जेट्टी पर शांतिपूर्ण धरना देने की घोषणा करते हुए जनप्रतिनिधि
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सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : बंबूफ्लैट क्षेत्र में आम जनता, सामाजिक कार्यकर्ता और समुदाय प्रतिनिधियों द्वारा 12 नवम्बर को बंबूफ्लैट जेट्टी पर शांतिपूर्ण धरना देने की घोषणा के साथ एक बड़ा जनआंदोलन आकार ले रहा है। यह आंदोलन चाथम ब्रिज की लंबी अवधि से बंदी और फेरी सेवाओं की अनियमितता के कारण हजारों निवासियों को हो रही गंभीर परेशानियों को उजागर करने के लिए आयोजित किया जा रहा है। ज़िला परिषद सदस्यों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं ने एक संयुक्त प्रेस वार्ता में प्रशासन की चुप्पी पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि 15 अक्टूबर को मुख्य सचिव को औपचारिक पत्र भेजकर तुरंत कार्रवाई की मांग की गई थी, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला, जिसके कारण लोगों ने शांतिपूर्ण धरना आयोजित करने का निर्णय लिया है। स्टुअर्टगंज क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता पी. शम्सुद्दीन ने बताया कि चाथम ब्रिज लगभग चार महीने से बंद है, जिससे छात्रों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को प्रतिदिन कठिन मौसम में एक किलोमीटर से अधिक पैदल चलकर फेरी या कार्यस्थल तक पहुंचना पड़ता है। शोअल बे, डंडूस पॉइंट, नमूनागर और जिरकाटांग जैसे दूरस्थ क्षेत्रों के लोग सबसे अधिक प्रभावित हैं।

उन्होंने कहा, “हर दिन 2,500 से 3,000 लोग इस मार्ग पर निर्भर हैं। धूप हो या बारिश, महिलाएँ बच्चों और सामान के साथ दूर तक चलकर फेरी पकड़ती हैं। यह स्थिति अब असहनीय हो चुकी है।” स्थानीय लोगों ने फेरी सेवाओं की अनियमितता को भी बड़ा मुद्दा बताया। उनका कहना था कि कभी-कभी एम्बुलेंस और मरीजों को दो घंटे तक अगली फेरी का इंतजार करना पड़ता है। “यह बेहद असंवेदनशील और अमानवीय है,।” वक्ताओं ने प्रशासन से वाहन फेरी सेवा को नियमित करने, पुरानी जेट्टी को अस्थायी रूप से खोलने और तीन-व्हीलर या ऑटो को चाथम मार्ग पर अनुमति देने की मांग की। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन राजनीतिक नहीं, बल्कि जनहित का मुद्दा है। फेरारगंज से विम्बर्लीगंज तक कई बैठकों के बाद 36 सदस्यीय समन्वय समिति का गठन किया गया है जो इस धरने को शांतिपूर्ण तरीके से संचालित करेगी। उन्होंने बताया कि आवश्यक सेवाएँ बाधित नहीं होंगी, लेकिन 12 नवम्बर की सुबह 7 बजे से यदि प्रशासन ने कदम नहीं उठाए तो सामान्य यातायात रोका जाएगा। सामाजिक कार्यकर्ता अभिभूषण घोष ने कहा, “यह गुस्से का नहीं, बेबसी का विरोध है। प्रशासन को अब तत्काल कदम उठाना चाहिए, अन्यथा जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी।”

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