श्रद्धा और उल्लास के साथ मना बाबा श्री रामदेवजी का दशमी महोत्सव

श्रद्धा और उल्लास के साथ मना बाबा श्री रामदेवजी का दशमी महोत्सव
Published on: 

सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : पश्चिम बंगाल की शस्य-श्यामला धरा पर उस समय मरुधरा का अनुपम सौंदर्य, शौर्य और अध्यात्म जीवंत हो उठा, जब रामसा पीर मंडल के तत्वावधान में सोमवार को लोकदेवता बाबा श्री रामदेवजी का भव्य दशमी महोत्सव आयोजित किया गया। ''राजेश गणपति बैंक्वेट'' में आयोजित इस महाउत्सव में ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो कोलकाता के दिल में राजस्थान का परिवेश ही उतर आया हो। राजस्थानी पारंपरिक परिधानों—रंग-बिरंगी पोशाकों में सज-धजकर पहुंचे श्रद्धालुओं से समूचा परिसर उल्लास, आस्था और सामाजिक समरसता के रंगों से सराबोर नजर आया। ''रामसा पीर जुम्मा'' (अमृत कथा) में कथा वाचक लक्ष्मीकांत व्यास ‘मुन्नाजी’ ने बाबा रामदेवजी के जीवन, उनके लोककल्याणकारी आदर्शों, सांप्रदायिक सद्भाव और मानव मात्र के प्रति समानता के दिव्य संदेश की महिमा का बखान किया। कथा वाचन ने उपस्थित जनसमूह को भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से जोड़ दिया। भव्य भजन संध्या में जोधपुर के सुप्रसिद्ध भजन गायक प्रकाश माली ने अपनी सुमधुर वाणी में एक से बढ़कर एक भक्ति भजनों की प्रस्तुति देकर समूचे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। उनके भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे। उल्लेखनीय है कि सामाजिक समरसता के प्रतीक इस रामसा पीर मंडल की स्थापना स्मृतिशेष शंकरलाल अग्रवाल द्वारा की गई थी। इस वर्ष के भव्य आयोजन को ऐतिहासिक बनाने में मंडल के चेयरमैन भीखमचंद पुगालिया, अध्यक्ष प्रह्लाद राय गोयनका, सचिव जुगल राठी एवं संयोजक प्रकाश कुमार डागा सहित समस्त पदाधिकारियों व सदस्यों की सराहनीय भूमिका रही। कोलकाता की धरती पर आयोजित इस दशमी महोत्सव ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि राजस्थान की भक्ति और शौर्य की गौरवशाली परंपराएं सीमाओं से परे जन-जन के हृदय को आपसी प्रेम, एकता और सेवा के अटूट सूत्र में पिरोने का सशक्त माध्यम हैं।

सन्मार्ग को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in