

अयोध्या : अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले फंड में कथित हेराफेरी की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और मंदिर से जुड़े लोगों को अयोध्या न छोड़ने का निर्देश दिया है। मंदिर के सूत्रों के मुताबिक, तीन सदस्यों वाली SIT ने रविवार को लखनऊ रवाना होने से पहले यह निर्देश जारी किया।
मंदिर के सूत्रों के अनुसार, जांच से जुड़ी डेली रिपोर्ट - जिसमें ट्रस्ट के अधिकारियों और जांच से जुड़े अन्य लोगों से पूछताछ की जानकारी शामिल है - को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को सौंपने से पहले इस रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा। बताया जा रहा है कि SIT रोज अपनी रिपोर्ट सीएमओ भेज रही है।
सूत्रों के हवाले से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार SIT की जांच सिर्फ कथित तौर पर फंड के गबन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मंदिर ट्रस्ट की ओर से अलग-अलग चरणों में जमीन की खरीद और मंदिर के लिए निर्माण सामग्री की खरीद भी शामिल रही। सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट ने बाजार भाव से लगभग 500 से 800 प्रतिशत अधिक कीमत पर करीब 71 एकड़ जमीन खरीदी है
कथित तौर पर मंदिर ट्रस्ट ने बाजार भाव से ज्यादा कीमत पर जमीन खरीदी थी। समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी समेत कई राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था।
'ट्रस्ट के पदाधिकारी सोने, चांदी और अन्य आभूषणों और कीमती पत्थरों से संबंधित रिकॉर्ड पर SIT को संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।'
सूत्रों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में भगवान राम को चढ़ाए गए सोने, चांदी के आभूषणों, हीरे और अन्य कीमती पत्थरों के रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी सामने आई है। सूत्रों ने बताया, 'ट्रस्ट के पदाधिकारी सोने, चांदी और अन्य आभूषणों और कीमती पत्थरों से संबंधित रिकॉर्ड पर SIT को संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।' सूत्रों के मुताबिक, सबसे बड़ी कथित अनियमितता कुंभ मेले के दौरान सामने आई, जब करीब दो महीने की अवधि में रोजाना लगभग 10 लाख श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे थे और दान पेटियां दो घंटे के भीतर ही नोटों से भर जाती थीं।
बैकअप सिस्टम में रिकॉर्डिंग सिर्फ 45 दिन तक सुरक्षित रहती है। नतीजतन, SIT पिछले महीनों या पुराने वीडियो नहीं देख पा रहे हैं। इससे यह पता लगाना मुश्किल हो गया है कि कथित गबन कब शुरू हुआ और कितने समय तक चला।
SIT को डिजिटल सबूत जुटाने में बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। सूत्रों ने शनिवार को बताया कि मंदिर परिसर का CCTV फुटेज केवल 45 दिनों तक ही स्टोर रहता है, जिसके बाद रिकॉर्डिंग अपने आप डिलीट हो जाती है। इससे SIT के लिए पुराने वीडियो रिकॉर्ड तक पहुंचना लगभग नामुमकिन हो गया है।
सूत्रों के अनुसार, बैकअप सिस्टम में रिकॉर्डिंग सिर्फ 45 दिन तक सुरक्षित रहती है। नतीजतन, SIT पिछले महीनों या पुराने वीडियो नहीं देख पा रहे हैं। इससे यह पता लगाना मुश्किल हो गया है कि कथित गबन कब शुरू हुआ और कितने समय तक चला।
सूत्रों ने बताया कि CCTV फुटेज के साथ छेड़छाड़ के संकेत भी मिले हैं। डिलीट या बदले गए डेटा को हासिल करने की कोशिश की जा रही है।
अयोध्या राम मंदिर में मिले दान में हेराफेरी के आरोपों के बाद, मंदिर ट्रस्ट की गुजारिश पर 13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने एक SIT बनाई थी। इस SIT में लखनऊ डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं।