एक नजर इन आकड़ों पर
रूट - पुराना किराया - नया किराया
बेहला चौरास्ता → टॉलीगंज - 22 रु. - 24 रु.
फूलबागान → ग्रीस पार्क रूट - 20 रु. - 25 रु.
टॉलीगंज करुणामयी → महाबीर तल्ला - 12 रु. - 15 रु.
हरिदेवपुर → टॉलीगंज - 15 रु. - 17 रु.
गैस के लिए भटक रहे ऑटो चालक, 10-10 घंटे इंतजार
मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : महानगर में इन दिनों एलपीजी गैस की कमी ने ऑटो चालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। शहर के विभिन्न गैस पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जहां चालकों को समय पर गैस नहीं मिल पा रही है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि पहले जहां कुछ घंटों में गैस मिल जाती थी, वहीं अब हालात ऐसे हो गए हैं कि चालकों को पूरी रात लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है। ऑटो चालकों का कहना है कि अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं निकाला गया, तो उनके लिए रोजगार चलाना मुश्किल हो जाएगा।
गैस के लिए रातभर लाइन में, दिन में कैसे चलेगा ऑटो?
कई ऑटो चालकों ने बताया कि गैस भरवाने के लिए उन्हें शाम से ही पंप पर लाइन में लगना पड़ता है। एक ऑटो चालक बबलू साव ने अपनी परेशानी साझा करते हुए बताया कि वह शाम करीब 7 बजे हाई रोड स्थित गैस पंप पर लाइन में खड़े थे। लंबी प्रतीक्षा के बाद रात लगभग 10 बजे उसे एक कूपन नंबर दिया गया, जिससे उसे उम्मीद जगी कि जल्द ही उसकी बारी आएगी लेकिन देर रात करीब 1:30 बजे पंप के एक कर्मचारी ने सूचित किया कि गैस खत्म हो चुकी है। इसके बाद मजबूरन उसे वहां से झिझिरिया बाजार स्थित दूसरे पंप की ओर जाना पड़ा, जहां उसे सुबह करीब 6 बजे गैस मिल सकी। इस पूरी प्रक्रिया में उसे लगभग 10 घंटे तक लगातार इंतजार करना पड़ा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में पूरी रात जागने के बाद सुबह काम करना बेहद कठिन हो जाता है, जिससे उनकी दिनचर्या और रोजगार दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
पहले आसान था, अब दिनभर का संघर्ष
अनिल यादव ने कहा कि पहले जहां 3 से 4 घंटे के भीतर गैस मिल जाती थी, जिससे उनका काम प्रभावित नहीं होता था लेकिन अब स्थिति इतनी खराब हो गई है कि पूरा दिन या पूरी रात लाइन में बितानी पड़ रही है। इससे उनकी आमदनी भी घट रही है और मानसिक तनाव भी बढ़ रहा है। उनका कहना है कि बिना नींद के गाड़ी चलाना उनके लिए खतरनाक साबित हो सकता है। थकान के कारण दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। राजू गुप्ता ने बताया कि वह हाल ही में करीब 400 ऑटो की लंबी लाइन में खड़ा था, जहां उसका नंबर 335 था। जब आखिरकार उसकी बारी आयी, तो उसे केवल 5 लीटर गैस ही मिल पाई। इतनी कम गैस में दिनभर काम चलाना लगभग असंभव है।