पोक्सो मामलों के पीपी की दक्षता का आकलन करें

सोमवार को रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश
पोक्सो मामलों के पीपी की दक्षता का आकलन करें
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उनकी भूमिका पर जस्टिस घोष ने जताई नाराजगी

जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : हाई कोर्ट के जस्टिस तीर्थंकर घोष ने आदेश दिया है कि पोक्सो के मामलों में सरकार की तरफ से पैरवी करने वाले पब्लिक प्रॉसिक्यूटरों की दक्षता की जांच की जाए। उन्होंने राज्य सरकार के लीगल रिमेंबरेस को यह आदेश दिया है। पोक्सो के एक मामले की सुनवाई करते समय उन्होंने स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की भूमिका पर सख्त नाराजगी जताई। उन्होंने इस मामले में सोमवार को रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।

जस्टिस घोष ने कहा है कि उनकी भूमिका के कारण न्याय दिलाने के मामले में कोर्ट के हाथ थम जा रहे हैं। ट्रायल कोर्ट में उनकी भूमिका के कारण यह स्थिति बनती है। पोक्सो के मामलों के लिए इन स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटरों की नियुक्ति की गई है। सभी जिलों के पब्लिक प्रॉसिक्यूटरों को यह आदेश दिया गया है। जगतबल्लभपुर थाने के एक पोक्सो के मामले के अभियुक्त की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस घोष ने बेहद सख्त टिप्पणी की। राज्य सरकार की तरफ से बहस कर रहे एडवोकेट ने जमानत दी जाने का विरोध किया। जस्टिस घोष ने कहा कि पर राज्य सरकार की तरफ से दाखिल मेमो आॉफ एविडेंस से ऐसा नहीं लगता है की जमानत दी जाने का विरोध कर रहे हैं। धारा 164 के तहत लिए गए पीड़िता के बयान को ना तो उसे पढ़कर सुनाया गया और न ही उसे साक्ष्य के रूप में पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि जिस अंदाज में ट्रायल चल रहा है उससे यह अंदाजा हो गया है कि इसका परिणाम क्या होगा। उन्होंने नाराजगी जागते हुए कहा कि कोर्ट एक तमाशा बनकर रह गया है। इन कमजोर साख्यों की वजह से अभियुक्त को जमानत दी जाती है। उसने 13 साल की एक बच्ची के साथ बलात्कार किया था। रिपोर्ट से यह साबित हो गया है कि इसके बाद पैदा होने वाले बच्चे का पिता वही था।

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