

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : मकर संक्रांति अब कुछ ही दिनों दूर है और शहर के बाजार इस पर्व की तैयारियों में पूरी तरह रंग-बिरंगे नजर आ रहे हैं। बाजारों में गुड़ और तिल से बने लड्डू, तेल-सरसों के नए सामान और तिलकुट की दुकानों ने अपनी रौनक बढ़ा दी है। खासकर गुड़ के लड्डू और तिलकुट की बिक्री में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, क्योंकि यह पर्व पारंपरिक रूप से तिल और गुड़ खाने और बांटने का होता है।
स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि इस बार गुड़ के लड्डू और तिलकुट की बिक्री में पहले से कहीं ज्यादा तेजी आई है। इसके पीछे प्रमुख कारण ठंड के मौसम के साथ-साथ लोगों में त्योहार की खुशियों को लेकर बढ़ती उत्सुकता है। दुकानदारों ने अपने स्टालों को रंग-बिरंगे ढंग से सजाया है और हर उम्र के लोगों के लिए अलग-अलग आकार और डिज़ाइन के लड्डू उपलब्ध कराए हैं।
गुड़ और तिल से बने लड्डू न केवल स्वाद में लाजवाब होते हैं बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माने जाते हैं। स्थानीय निवासी रितु मेहरा ने बताया, “हम हर साल मकर संक्रांति पर अपने रिश्तेदारों और पड़ोसियों को तिल और गुड़ के लड्डू बांटते हैं। यह हमारी परंपरा का हिस्सा है और बच्चों को भी बहुत पसंद आता है।”
बाजारों में दुकानदार न सिर्फ स्वादिष्ट लड्डू और तिलकुट बेच रहे हैं, बल्कि उन्हें आकर्षक पैकेजिंग में सजाकर त्योहार के अवसर के हिसाब से पेश कर रहे हैं। इसके अलावा कई दुकानों ने घर-घर डिलीवरी की सुविधा भी शुरू कर दी है ताकि ग्राहक अपने घर बैठे ही त्योहार की खरीदारी कर सकें।
मकर संक्रांति को सूरज देव की पूजा और सूर्य के उत्तरायण होने की खुशी में मनाया जाता है। इस अवसर पर लोग अपने घरों में तिल और गुड़ से बने व्यंजन बनाते हैं और इन्हें परिवार और मित्रों के साथ बांटते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तिल और गुड़ का सेवन शरीर को गर्मी और ऊर्जा देता है, जो सर्दियों के मौसम में बेहद जरूरी होता है।
इस तरह, मकर संक्रांति के त्योहार ने न केवल बाजारों में उत्साह बढ़ा दिया है बल्कि लोगों के बीच परंपराओं और संस्कृति को जीवंत बनाए रखने का अवसर भी प्रदान किया है। इस साल त्योहार की तैयारियों ने यह साबित कर दिया है कि गुड़ और तिल के लड्डू अभी भी इस पर्व की पहचान हैं।