

पश्चिम बंगाल भाजपा की नई प्रदेश कमेटी में पूर्व सांसद और कभी पार्टी के कद्दावर चेहरे रहे अर्जुन सिंह को जगह नहीं मिलना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। संगठनात्मक फेरबदल के तहत जारी नई सूची में उनका नाम न होना भाजपा के भीतर बदलती प्राथमिकताओं और नेतृत्व रणनीति की ओर इशारा करता है।
भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार को पश्चिम बंगाल के लिए राज्य कार्यालय पदाधिकारियों और विभिन्न राज्य विभागों के पदाधिकारियों की नई सूची जारी की। इस सूची में पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के उद्देश्य से कई नई नियुक्तियां की गई हैं। सभी नियुक्तियां राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा की सहमति और अनुमोदन से तत्काल प्रभाव से लागू की गई हैं। हालांकि इस पूरी सूची में अर्जुन सिंह का नाम कहीं नजर नहीं आया।
भाजपा सूत्रों के मुताबिक, आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पार्टी संगठन को नए सिरे से गढ़ने में जुटी है। पुराने और विवादों से जुड़े चेहरों की जगह नए नेतृत्व को आगे लाने की रणनीति पर काम हो रहा है। ऐसे में अर्जुन सिंह को प्रदेश कमेटी से बाहर रखना इसी रणनीतिक बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है।
अर्जुन सिंह कभी तृणमूल कांग्रेस के प्रभावशाली नेता रहे हैं और बैरकपुर इलाके में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती थी। बाद में उन्होंने भाजपा का दामन थामा और 2019 के लोकसभा चुनाव में बैरकपुर सीट से जीत दर्ज की। उस समय उन्हें बंगाल में भाजपा के आक्रामक चेहरों में गिना जाता था। हालांकि बाद के वर्षों में पार्टी के भीतर उनका प्रभाव कमजोर पड़ता गया।
2021 के विधानसभा चुनाव और बाद की राजनीतिक घटनाओं में अर्जुन सिंह अपेक्षित भूमिका नहीं निभा सके। पार्टी के भीतर गुटबाजी और लगातार विवादों के कारण उनका कद धीरे-धीरे सीमित होता चला गया। यही वजह मानी जा रही है कि नई प्रदेश कमेटी में उन्हें शामिल नहीं किया गया।
इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस के सांसद पार्थ भौमिक ने चुटकी लेते हुए कहा कि अब भाजपा को भी समझ आ गया है कि अर्जुन सिंह में पहले जैसा दम नहीं रहा और वे राजनीतिक रूप से अप्रासंगिक हो चुके हैं। प्रदेश भाजपा कमेटी से अर्जुन सिंह की अनुपस्थिति न केवल उनके राजनीतिक भविष्य पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि भाजपा बंगाल में नए नेतृत्व और नई रणनीति के साथ आगे बढ़ने का मन बना चुकी है।