

नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में प्लास्टिक यानी पॉलिमर आधारित बैंकनोट्स शुरू करने की संभावना पर विचार कर रहा है। नोटबंदी के बाद भारतीय करेंसी में यह सबसे बड़ा बदलाव हो सकता है। बढ़ती नकदी की मांग, नोट छापने की बढ़ती लागत और कागजी नोटों के जल्दी खराब होने जैसी चुनौतियों को देखते हुए RBI इस विकल्प पर गंभीरता से मंथन कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार, RBI की हालिया बोर्ड बैठकों में पॉलिमर नोटों को लेकर चर्चा हुई है। पॉलिमर बैंकनोट विशेष प्रकार के सिंथेटिक प्लास्टिक, Biaxially Oriented Polypropylene (BOPP) से बनाए जाते हैं। ये नोट सामान्य कागजी नोटों की तुलना में अधिक मजबूत, टिकाऊ और लंबे समय तक चलने वाले होते हैं। साथ ही इनमें आधुनिक सुरक्षा फीचर्स भी आसानी से जोड़े जा सकते हैं।
RBI के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में बैंकनोट छापने पर 6,372 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी ज्यादा है। बड़ी संख्या में 100 और 500 रुपये के नोट खराब होने के कारण उन्हें चलन से बाहर भी करना पड़ा।
पॉलिमर नोटों का उपयोग दुनिया के 60 से अधिक देशों में किया जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया ने 1988 में इसकी शुरुआत की थी, जबकि कनाडा, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड और रोमानिया जैसे देश भी इन्हें अपना चुके हैं।
हालांकि RBI की ओर से अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो भारतीय मुद्रा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।